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संजीत हत्याकांड: फिरौती के 30 लाख दिए थे या नहीं ? जांच करेंगे एडीजी

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कानपुर। उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाएं चरम पर पहुंच गई है। इन अपराधों को नियंत्रण में रखने में यूपी पुलिस पूरी तरह नाकाम हो रही है। सीएम अजय सिंह बिष्ट ने सख्त कदम उठाते हुए शुक्रवार को अपर पुलिस अधीक्षक, दक्षिणी कानपुर नगर, आईपीएस अपर्णा गुप्ता और मनोज गुप्ता तत्कालीन सीओ को निलंबित कर दिया। इसके अलावा पूर्व प्रभारी निरीक्षक थाना बर्रा रणजीत राय और चौकी इंचार्ज राजेश कुमार को निलंबित कर दिया है। अपहरण की घटना में फिरौती के लिए पैसे दिए गए या नहीं? इस संबंध में एडीजी, पुलिस हेडक्वार्टर्स लखनऊ बीपी जोगदंड को तत्काल कानपुर पहुंचकर जांच के लिए निर्देश दिए गए है।

परिजनों ने लगाया लापरवाही के आरोप
बता दें कि कानपुर के बिकरू कांड, फिर लैब टेक्नीशियन की अपहरण—हत्या व गाजियाबाद में पत्रकार की हत्या मामले प्रदेश सहित पूरे देश में चर्चा में रहे। अपराध की इन बेलगाम घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने यूपी पुलिस विभाग से अपनी नाराजगी जाहिर की है।

इससे पहले संजीत के परिजनों ने कहा था कि पुलिस के कहने पर उन लाेगों ने अपहरणकर्ताओं को तीस लाख रुपये की फिरौती दी थी, लेकिन पुलिस अपहरणकर्ताओं पकड़ नहीं पाई है।
ब। संजीत यादव की बहन ने कहा कि पुलिस शुरुआत से ही इस मामले में लापरवाही बरत रही थी। अभी भी पुलिस को संजीत का बैग नहीं मिला है, हमें उसकी लाश नहीं मिली है। हमें बॉडी तो दिखा दो, आखिरी बार उसकी कलाई पर राखी तो बांध लूं।

यह है पूरा मामला
बता दें कि 22 जून की रात लैब टेक्नीशियन संजीत बर्रा पटेल चौक के पास स्थित पैथालॉजी में सैंपल देने के लिए निकला था। सैंपल देकर लौटते समय उसका अपहरण कर लिया गया। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब संजीत की कॉल डिटेल निकलवाई तो पता चला कि संजीत की बात राहुल नामक एक युवक, एक युवती सहित कई अन्य लोगों से हुई थी। पिता चमनलाल ने राहुल के खिलाफ बेटे के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। युवक संजीत के पिता ने बताया कि पुलिस के कहने पर फिरौती के 30 लाख रुपए से भरा बैग भी अपहर्ताओं के निर्देश पर गुजैनी पुल से नीचे फेंक दिया था। इसके बावजूद उसका अपहृत बेटा नहीं मिला। अब उसके हत्या होने की पुष्टि पुलिस ने कर दी है।


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