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कोविड 19 मरीजों के स्वस्थ होने की दर 61 फीसदी

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नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अऩुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा है कि वह महामारी रोगों के उपचार के लिए तेज रफ्तार से टीका बनाने के उद्देश्य से वैश्विक स्वीकार्य नियमों के अनुरूप काम कर रहा है। संस्थान ने कहा है कि देश में ही टीका तैयार करना जरूरी है, लेकिन साथ ही सुरक्षा, गुणवत्ता, नैतिकता और सभी नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं। इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोविड-19 मरीजों के स्वस्थ होने की दर बढ़ कर 60.81 प्रतिशत हो गई है।

बता दें कि आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने मिलकर कोविड-19 के संभावित उपचार के लिए कोवेक्सीन नाम का टीका विकसित करने का कार्य आरंभ किया है। भारत के औषध महानियंत्रक ने इस टीके के मानवीय परीक्षण के पहले और दूसरे चरण की अनुमति दे दी है। यह भारत द्वारा विकसित किया जाने वाला पहला स्वदेशी टीका है जो कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। वैक्सीन सार्स-कोविड-2 स्ट्रेन से लिया गया है जिसे पुणे स्थित  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा अलग कर भारत बायोटेक को सौंपा गया है। जायडेस के टीके को प्री-क्लीनिकल चरण पूरा करने के बाद कंपनी के अहमदाबाद स्थित वैक्सीन टेक्नोलॉजी सेंटर में विकसित किया गया है।
भारत बायोटेक और ज़ाइडस कैडिला ने इस लक्ष्य को पूरा करने के प्रयासों को गति दे दी है लेकिन अंतिम परिणाम इस परियोजना में शामिल सभी क्लीनिकल ​​साइटों के सहयोग पर निर्भर करेगा। इस बीच, भारत डब्ल्यूएचओ के सॉलिडेरिटी ट्रायल में भी हिस्सा ले रहा है। ये ट्रायल चार उपचार विकल्पों की तुलना करने के लिए किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल ​​परीक्षण है, जो काविड-19 के खिलाफ उनकी प्रभावशीलता का आकलन करेगा। एक अन्य शीर्ष भारतीय फार्मा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के संभावित कोविड-19 वैक्सीन की एक बिलियन खुराक की आपूर्ति करने के लिए ब्रिटिश दवा निर्माता एस्ट्राजेनेका के साथ अनुबंध किया है। भूपेंद्र सिंह, आकाशवाणी समाचार, दिल्ली।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में भारत सरकार के कार्यों की सराहना की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन में प्रमुख वैज्ञानिक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में परीक्षण किट बनाने में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने शुरू से ही कई प्रभावी कदम उठाए। उसने जनवरी महीने में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के अनुरूप प्रबंधन लागू कर दिये थे। उन्होंने कहा कि भारत को अब इस महामारी के डेटा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।


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