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भगोड़े नीरव मोदी को तगड़ा झटका

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ब्रिटेन की अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ मामला दोबारा खोलने से किया इनकार

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, लंदन/नई दिल्ली | पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 13,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में वांछित भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की भारत वापसी की राह और साफ हो गई है। लंदन उच्च न्यायालय ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने की मांग की थी।

भारत सरकार के आश्वासनों पर जताया भरोसा
लंदन उच्च न्यायालय के किंग्स बेंच डिवीजन में लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जे की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वे भारत सरकार द्वारा ‘नोट वर्बल’ (औपचारिक राजनयिक संदेश) के माध्यम से दिए गए आश्वासनों की गुणवत्ता पर भरोसा करते हैं। अदालत ने कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच जो आश्वासन दिए हैं, वे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भंडारी मामले का दिया था हवाला

नीरव मोदी ने भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी के मामले में आए हालिया फैसले को आधार बनाकर राहत मांगी थी। भंडारी के मामले में अदालत ने मानवाधिकारों और यातना की आशंका के चलते प्रत्यर्पण रोक दिया था। मोदी के वकीलों ने दलील दी थी कि मुंबई में जेल से अदालत ले जाते समय उसे भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है, जिसे पीठ ने सिरे से खारिज कर दिया।

CBI की बड़ी सफलता

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों का एक दल इस महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए लंदन में मौजूद था। सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि जांच एजेंसी के निरंतर और समन्वित प्रयासों के कारण इस कानूनी चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है।

नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है। उस पर अपने चाचा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर बैंक से भारी धोखाधड़ी करने का आरोप है, जिसमें अकेले मोदी ने करीब 6,498.20 करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। इस ताजा फैसले के बाद अब मोदी के पास भारत प्रत्यर्पण से बचने के कानूनी विकल्प लगभग समाप्त होते नजर आ रहे हैं।


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