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यूपी में कोर्ट केसों में पुलिस हस्तक्षेप पर रोक: सरकार बनाएगी नई गाइडलाइन, वकीलों से सीधे संपर्क नहीं कर सकेगी पुलिस

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  • जनहित याचिका में लगा पुलिस पर धमकाने का आरोप
  • वकील के घर छापे पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
  • दो पुलिसकर्मी निलंबित, अन्य को नोटिस

✍🏻 *प्रहरी संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को सूचित किया है कि वह कोर्ट में लंबित (सब-जूडिस) मामलों में पुलिस के गैरवाजिब हस्तक्षेप को रोकने के लिए जल्द ही राज्यस्तरीय गाइडलाइन जारी करेगी। सरकार ने इसके लिए कोर्ट से 10 दिन का समय मांगा है, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 28 जुलाई तय की है।

यह मामला जौनपुर जिले से जुड़ी एक जनहित याचिका के दौरान उठा, जिसमें 90 वर्षीय याचिकाकर्ता ने ग्रामसभा की ज़मीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया था। आरोप है कि स्थानीय पुलिसकर्मी याचिका वापस लेने का दबाव बना रहे थे। याचिकाकर्ता के वकील ने भी कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा। इस पर 11 जुलाई को हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वकीलों को धमकाना या डराना अस्वीकार्य है।

इसके बाद 15 जुलाई को जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने जौनपुर एसपी का हलफनामा रिकॉर्ड में लिया, जिसमें बताया गया कि दो पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं और अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

12 जुलाई को एसपी ने एक जिला स्तरीय आदेश जारी करते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि कोर्ट में लंबित मामलों से जुड़े स्थलों पर बिना अनुमति न जाएं और किसी भी अधिवक्ता से सीधे संपर्क न करें।

सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि ऐसी गाइडलाइन पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी, ताकि वकीलों और न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव की घटनाएं रोकी जा सकें।

 


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