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दबाव में झुकी दिल्ली: जाति अब आंकड़ों में दर्ज होगी

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1931 के बाद पहली बार जनगणना में जातिगत गणना शामिल की जाएगी

दो चरणों में होगी प्रक्रिया, केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, नई दिल्ली। जो सरकार कल तक जातिगत जनगणना को “देश तोड़ने वाली राजनीति” बताकर खारिज करती थी, वही अब वोट जोड़ने के लिए जाति गिनने पर मजबूर हो गई है। लगता है 2023 में बिहार की जाति गणना ने दिल्ली की नींद तोड़ दी है। जाति पूछने से डरने वाली सरकार अब जाति बताने को कह रही है।

केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस बारे में 16 जून, 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी जाएगी, जिसके तहत यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, और इसमें पहली बार 1931 के बाद जातिगत आंकड़े भी इकट्ठा किए जाएंगे। यह फैसला सामाजिक न्याय की राजनीति और विपक्षी दलों के दबाव के चलते एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

Census 2027: जानिए किस राज्य में कब शुरू होगा सर्वे

जनगणना 2027 के लिए दो संदर्भ तिथियां तय की गई हैं: सामान्य क्षेत्रों के लिए 1 मार्च 2027 (00:00 बजे) और लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 (00:00 बजे)। यह जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 तथा जनगणना नियम, 1990 के तहत कराई जाएगी।

2011 में की गई सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना (SECC) के आंकड़े सरकार ने जारी नहीं किए थे। लेकिन इस बार की जनगणना को केंद्र एक औपचारिक, पारदर्शी और नीतिगत निर्णयों के लिए उपयोगी प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रही है। जातिगत आंकड़ों के आधार पर आरक्षण व्यवस्था, ओबीसी में उपवर्गीकरण, बजटीय आवंटन और सामाजिक योजनाओं का पुनर्गठन किया जा सकता है।

अब तक भाजपा नेतृत्व जातिगत जनगणना से कतराता रहा है, लेकिन बिहार, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जातिगत सर्वेक्षण के सफल क्रियान्वयन और विपक्षी लामबंदी ने सरकार की सोच में बदलाव ला दिया। कांग्रेस, राजद, जदयू, द्रमुक जैसे दल लगातार जातिगत आंकड़ों की मांग कर रहे थे।

भारत की पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 में प्रस्तावित जनगणना COVID-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। उस समय मकान सूचीकरण का कार्य शुरू होने ही वाला था। अब 17 वर्षों के अंतराल के बाद 2027 में यह गणना देश की सबसे विस्तृत और राजनीतिक दृष्टि से अहम जनगणना मानी जा रही है।

हालांकि जातिगत गणना को लेकर सरकार को आंकड़ों की शुद्धता, प्रशिक्षित जनगणना कर्मियों और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने की चुनौती का सामना करना होगा। यह आंकड़े 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति और घोषणापत्रों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


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