✍🏻 प्रहरी संवाददाता, लखनऊ। भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक विरासत और राजनीतिक प्रभाव के लिए जाना जाता है, लेकिन खुशहाली के पैमाने पर यह सबसे निचले पायदान पर खड़ा है।
हाल ही में जारी वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, जहां हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब देश के सबसे खुशहाल राज्य बने, वहीं यूपी इस सूची में सबसे पिछड़ा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक असमानता, बेरोजगारी और निम्न जीवन स्तर इसकी प्रमुख वजहें हो सकती हैं।
हाल ही में जारी वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025 में भारत की स्थिति 118वें स्थान पर रही है, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा बेहतर है। हालांकि, देश अब भी पड़ोसी देशों नेपाल (92वां) और पाकिस्तान (109वां) से पीछे है।
उत्तराखंड-हिमाचल टॉप पर क्यों?
✅ प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ पर्यावरण – पहाड़ों की हरियाली और स्वच्छ हवा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।
✅ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं – अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता ज्यादा है।
✅ सामुदायिक सहयोग और आर्थिक स्थिरता – छोटे राज्यों में लोगों के बीच ज्यादा आपसी सहयोग देखने को मिलता है।
यूपी सबसे पीछे क्यों?
❌ बेरोजगारी और आर्थिक असमानता – युवाओं को स्थायी रोजगार मिलना मुश्किल हो रहा है।
❌ कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं – खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाओं की भारी कमी है।
❌ अपराध और असुरक्षा – महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
❌ शिक्षा की गिरती गुणवत्ता – सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है।
दुनिया का सबसे खुशहाल देश कौन?
फिनलैंड लगातार आठवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है। डेनमार्क, आइसलैंड, स्वीडन और नॉर्वे भी टॉप-5 में हैं। अफगानिस्तान सबसे निचले स्थान (143वें) पर है।
क्या यूपी बदल सकता है अपनी तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी को अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था में सुधार करना होगा। सरकार की नीतियों और आम जनता की भागीदारी से ही यह बदलाव संभव हो सकता है। यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो राज्य में सुधार की दिशा में कदम उठाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है।
