कोर्ट ने कहा, ऐसे मामलों में शिकायत आने के इंतजार में न बैठे रहें, हेट स्पीच में फौरन एक्शन ले सरकार
नई दिल्ली। हेट स्पीच के खिलाफ दाखिल एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘संविधान का अनुच्छेद-51 ए वैज्ञानिक सोच की बात करता है। 21वीं सदी चल रही है और हम धर्म के नाम पर कहां पहुंच गए हैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि हेट स्पीच से जुड़े अपराधों में सरकार को खुद संज्ञान लेकर कड़े एक्शन लेना चाहिए। ऐसे मामलों में शिकायत का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकारें हेट स्पीच के मामलों में एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करें। ऐसे मामलों में सरकारें खुद ही आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 295ए और 506 के तहत केस दर्ज करें। अदालत ने चेताया कि कार्रवाई में देरी हुई, तो यह अदालत की अवमानना होगी। ऐसा होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
‘हर शख्स की गरिमा अहम’
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम समाज को हेट स्पीच के जरिये निशाना बनाया जा रहा है। इसे रोका जाना चाहिए। अथॉरिटी ऐसे मामलों में एक्शन नहीं ले रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी कि बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा ने मुस्लिम समाज के लोगों का आर्थिक बहिष्कार करने की बात कही है।
अदालत ने कहा, हमारी ड्यूटी है कि लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो। कानून के शासन को बहाल रखा जाए। भारत सेक्युलर देश है। हर शख्स की गरिमा को सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। जो बयान याचिकाकर्ता ने अर्जी में बताया है, वह बेहद परेशान करने वाला और निंदनीय है।
