नई दिल्ली, १९ नवंबर 2022 : सुप्रीम कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति लागू करने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को गौर करना है. अदालत इसमें नहीं जा सकती, क्योंकि इसमें कई सामाजिक और पारिवारिक मुद्दे शामिल हैं.
जन्म में वृद्धि के बावजूद भारत की जनसंख्या स्थिर होने के बारे में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है, जिस पर अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए. जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका ने कहा कि जनसंख्या कोई ऐसी चीज नहीं है, जो किसी एक दिन रुक जाएगी.
याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट यह समझने में विफल रहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार, पीने के पानी का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, शांतिपूर्ण नींद का अधिकार, आश्रय का अधिकार, आजीविका का अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 और 21ए के तहत शिक्षा के अधिकार की गारंटी जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित किए बिना सभी नागरिकों को सुरक्षित नहीं किया जा सकता था.
