डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आपसी बयानबाजी का दौर जारी है। संसद की सुरक्षा में सेंध को लेकर जहां विपक्षी दल केंद्रीय मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग कर रहे हैं, तो वहीं सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर बहस करने से बचते हुए उपराष्ट्रपति मिमिक्री मामले को तुल देकर विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने की नीति अपना रहा है। भारी हंगामे के बीच विपक्ष के लगभग 150 सांसद निलंबित किए जा चुके हैं और इसी का फायदा उठाते हुए सत्ता पक्ष ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा लिया।
विपक्षी सांसदों के हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने 149 सांसदों को निलंबित कर चुके हैं। गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ एक विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन में शामिल सांसदों को अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने 22 दिसंबर को सुबह 11 बजे जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
बता दें कि सरकार इस शीतकालीन सत्र में कई नए बिलों को पास कराना चाहती है। यही वजह है कि विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद भी संसद में कई अहम बिलों को लोकसभा में पेश किया गया। लोकसभा में सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023 और प्रेस व आवधिक पंजीकरण विधेयक, 2023 के अलावा राज्यसभा में भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023,भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 और दूरसंचार विधेयक, 2023 को पारित करने के लिए पेश किया है।
बुधवार को लोकसभा में पेश हुए अहम बिल
बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र के 13वें दिन बुधवार (20 दिसंबर) को लोकसभा में मौजूदा आपराधिक कानूनों (Criminal Law Bills) को बदलने के लिए लाए गए 3 विधेयक पास हो गए। विपक्ष के कुल 97 सांसदों की गैर-मौजूदगी में नए क्रिमिनल बिल पर चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया, जिसके बाद इन बिलों को पास कर दिया गया।
