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सामाजिक बहिष्कार…लेकिन…

सामाजिक बहिष्कार तब अच्छी बात है….जब हम शातिर व घटिया तबकों का सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार करें। ऐसा होना चाहिए। अफसोस की बात है कि हम लालची, शातिर, ढोंगी व आपराधिक तबकों का बहिष्कार नहीं कर पाते…हम नतमस्तक हो जाते हैं और अपनी दादागिरी वाली ओछी काबिलियत समाज के दबे कुचले लोगों पर जताने लगते हैं।

महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। ऐसा आदेश देने के आरोप में एक जाति की पंचायत के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। मामला यह था कि पीड़ित परिवार ने कथित तौर पर कंजरभाट समुदाय की पंचायत को संपत्ति विवाद में हस्तेक्षप किए जाने से रोक दिया था। बस इत्ती सी बात पर महाबली लोगों ने सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया।

पुणे जिले की सासवड तालुका में कंजरभाट समुदाय की महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा कि पिछले महीने जाट पंचायत की ओर से साल भर के लिए उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने के आदेश दिए गए हैं। उसके पिता की मौत के बाद उसकी मां और एक अन्य महिला के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो गया था। दूसरी महिला के शिकायतकर्ता के पिता से संबंध थे। मामला जाति पंचायत में पहुंचा, लेकिन शिकायतकर्ता और उसकी मां ने पंचायत के सामने पेश होने से इंकार कर दिया। पंचायत ने इस बहिष्कार को वापस लेने के ऐवज में परिवार से एक लाख रुपये, पांच बकरी और पांच शराब की बोतलें देने का आदेश दिया।


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