प्रहरी संवाददाता, मुंबई। एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आतंकवाद रोधी कानून के तहत गिरफ्तार किए गए पादरी-कार्यकर्ता स्टैन स्वामी का निधन हो गया। जमानत का इंतजार करते-करते सोमवार को अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत का इंतजार कर रहे थे।
स्वामी के वकील के मुताबिक देश में आतंकवाद के मामले में शायद वह सबसे बुजुर्ग आरोपी थे। स्वामी 84 साल के थे। रविवार से उन्हें अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। बांद्रा के होली फैमिली अस्पताल के निदेशक डॉ इयान डिसूजा और कार्यकर्ता के वकील मिहिर देसाई ने उच्च न्यायालय को बताया कि दिल का दौरा पड़ने से स्वामी की मौत हुई है।
न्यायमूर्ति एस. एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एन. जे. जामदार की पीठ ने इस खबर पर हैरानी जतायी और कहा कि उन्हें कुछ कहने के लिए शब्द नहीं मिल रहे हैं। एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों में स्वामी सबसे बुजुर्ग थे। इस मामले में विद्वान, वकील, शिक्षाविद, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और एक उम्रदराज कवि भी गिरफ्तार किए गए हैं।
जेसुइट प्रोविंशियल ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर स्वामी के निधन पर शोक जताया। संगठन ने कहा कि पादरी ने ताउम्र ‘आदिवासियों, दलितों और वंचित समुदायों’ के लिए काम किया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वामी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वह न्याय और मानवीयता के हकदार थे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी की मौत केंद्र की उदासीनता की वजह से हुई। केंद्र सरकार को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन ने ट्वीट किया, ‘सब खत्म हो गया। मोदी, शाह ने उदार जेसुइट सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी की हिरासत में हत्या को अंजाम दिया। स्वामी ने अपना जीवन उत्पीड़ितों की सेवा में बिताया। मुझे उम्मीद है कि जिन न्यायाधीशों ने उन्हें जमानत देने से इनकार किया था, उन्हें रात को कभी नींद नहीं आएगी। उनके हाथों पर खून के निशान हैं।’
