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प्राइवेट ट्रेनों के साथ प्राइवेट मालगाड़ी भी चलाने की तैयारी में रेलवे

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे पटरी पर प्राइवेट ट्रेनें ही नहीं, बल्कि प्राइवेट मालगाड़ी भी दौड़ाने का फैसला किया है। रेलवे के इस फैसले के बाद जल्द ही पटरी पर प्राइवेट ट्रेनें भी चलती नजर आएंगी। केंद्र सरकार ने मार्च 2023 से प्राइवेट ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। भारतीय रेलवे, प्राइवेट ट्रेनों के साथ ही प्राइवेट मालगाड़ी को भी चलाने की योजना बना रहा है।

होगा डेडिकेटेड कॉरिडोर

भारतीय रेलवे, प्राइवेट मालगाड़ी चलाने के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर को तेजी से ट्रैक कर रहा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी.के. यादव ने कहा कि साल 2023 में प्राइवेट ट्रेनों के रोलआउट से पहले एक रेलवे रेगुलेटर बनाया जाएगा। चेयरमैन यादव ने कहा कि एक बार डीएफसी के तैयार हो जाने के बाद हम प्राइवेट मालगाड़ी को चलाने की योजना बना रहे हैं। वे वैगन और कंटेनर में इन्वेस्ट करेंगे। इस तरह रेगुलेटर के पास पैसेंजर ट्रेनों और मालगाड़ियों को रेगुलेट करने की जिम्मेदारी होगी।उन्होंने कहा, सभी संभावित आर्थिक नतीजों पर विचार करने के बाद प्राइवेट मालगाड़ी को दौड़ाने का फैसला सचिव के समूहों ने लिया है।

151 प्राइवेट ट्रेनें शुरू करने की योजना
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2023 से प्राइवेट ट्रेनें चलाने की दिशा में टाइमलाइन जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2026-27 तक कुल 151 प्राइवेट ट्रेनें शुरू करने की योजना है। इसके तहत वर्ष 2023 में प्राइवेट ट्रेनों के पहले सेट की शुरुआत होगी, जिसमें 12 ट्रेनें चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों को चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों की ओर से शुरुआत में करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

 

आरएफक्यू के लिए विज्ञापन जारी

बता दें कि प्राइवेट ट्रेनें चलाने के लिए भारतीय रेलवे ने 8 जुलाई को रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्राइवेट ट्रेनें चलाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन प्रोसेस के नवंबर तक फाइनल होने की उम्मीद है। मार्च 2021 तक निविदाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा और मार्च 2023 से रेलगाड़ियों का संचालन शुरू हो जाएगा।

 

मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट
रेलवे के अनुसार, इनमें से 70 फीसदी प्राइवेट ट्रेनों का निर्माण भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा। इसे चलाने वाली प्राइवेट कंपनी ही उसके मेंटेनेंस, खरीद और ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिम्मेदार होगी। बताया जा रहा है कि प्रत्येक ट्रेन में कम से कम 16 डिब्बे होंगे। ट्रेनों को ऐसे डिजाइन किया जाएगा कि वे 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी।


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