योगी सरकार की ‘डिजिटल गर्माहट’: ठिठुरते बच्चे, अटकी 1200 रुपए की राहत
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, लखनऊ | उत्तर प्रदेश में दिसंबर की ठंड जमकर कड़क रही है, ऐसे में ठंड ही नहीं, सरकारी व्यवस्था भी जम गई है। योगी सरकार की डीबीटी वाली गर्माहट अब भी कागज़ों और पोर्टल के लूप में अटकी है। लगभग 10 लाख सरकारी स्कूलों के बच्चे अब तक वो 1200 रुपए नहीं देख पाए, जिनके दम पर स्वेटर, जूते-मोजे और बैग खरीदने का सपना दिखाया गया था। कागज़ी दावों में ‘किसी बच्चे को बिना स्वेटर स्कूल नहीं आने दिया जाएगा’, लेकिन हकीकत यह है कि गरीब बच्चे ठिठुरती सुबहों में फटी यूनिफॉर्म और चप्पलों में क्लास तक पहुंच रहे हैं।
योगी सरकार फाइलों में “डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर” की दुहाई दे रही है, पर जमीनी हकीकत यह है कि बच्चों की उंगलियां ही नहीं, सिस्टम भी सुन्न पड़ा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस साल परिषदीय स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे, बैग और स्टेशनरी की रकम सीधे अभिभावकों के खातों में भेजने का फैसला लिया था, लेकिन तकनीकी अड़चनें इस ‘डिजिटल सुविधा’ की सबसे बड़ी दुश्मन बन गईं।
लगभग 3.5 लाख बच्चों के अभिभावकों का आधार अब तक बना ही नहीं और करीब 6.5 लाख अभिभावकों का आधार बैंक खाते से लिंक नहीं है, नतीजतन 10 लाख से ज्यादा बच्चे फाइलों, सर्वर और वेरिफिकेशन की जंग में फंस गए हैं।
अफसरों के मुताबिक, कैंप लग रहे हैं, आधार बन रहा है, लिंकिंग तेज है, लेकिन गांवों से बीआरसी तक पहुंचने में अभिभावक की जेब और हाड़ दोनों एक साथ टूट रहे हैं।जमीन पर नजारा यह है कि कई जिलों में बच्चे बिना स्वेटर, बिना जूते-मोजे के सुबह-सुबह ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं, कई की तबीयत भी बिगड़ गई है।
शिक्षक बता रहे हैं कि 40 फीसदी तक बच्चे अब भी पुरानी, फटी यूनिफॉर्म और चप्पलों में आने को मजबूर हैं, जबकि सरकार के विज्ञापनों और बयानों में सबको समय पर मदद पहुंचाने का ढोल पीटा जा रहा है।
अधिकारी आश्वासन दे रहे हैं कि दिसंबर के आखिर या जनवरी के पहले हफ्ते तक सभी लंबित मामलों का निपटारा हो जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि ठिठुरती सर्दी बच्चों के शेड्यूल से चलेगी या सरकार की ‘इवेंट वाली टाइमिंग’ के हिसाब से।
