एक संयुक्त अध्ययन समूह का गठन
डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। ट्रांसजेंडर्स समुदाय के लिए जल्द ही भारतीय फौज में शामिल होने का मौका मिल सकता है। भारतीय सशस्त्र बल में भी ट्रांसजेंडर्स के लिए संभावित रोजगार के अवसरों का अध्ययन शुरू है। ट्रांसजेंडर्स (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और इसके नतीजों का आकलन किया जा रहा है।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगस्त में बैठक के बाद प्रधान कार्मिक अधिकारी समिति (पीपीओसी) द्वारा एक संयुक्त अध्ययन समूह का गठन किया गया था।
बता दें कि ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों की रक्षा करने और स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं और लाभों में उनके हाशिए पर जाने और भेदभाव को रोकने के लिए जनवरी 2020 में ट्रांसजेंडर्स (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 पेश किया गया था। सशस्त्र बल वर्तमान में ऐसे लोगों को भर्ती नहीं करते हैं जो खुद को ट्रांसजेंडर या समलैंगिक के रूप में पहचानते हैं।
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (डीजीएएफएमएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता वाले एक समूह को अधिनियम के परिणामोंपर चर्चा करने और रक्षा बलों में इसके कार्यान्वयन के लिए आगे का रास्ता सुझाने का काम सौंपा गया है। प्रधान कार्मिक अधिकारी समिति (पीपीओसी) में तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। यह सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) का त्रि-सेवा चिकित्सा संगठन है।
ट्रांसजेंडर्स को विशेष रियायत नहीं देने की सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक, ज्यादातर निदेशालय पहले ही अपनी टिप्पणियां और सुझाव दे चुके हैं, जिन पर चर्चा प्रारंभिक चरण में है। हालांकि कुछ लोग इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यदि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सेना में शामिल होना है, तो उन्हें प्रशिक्षण, चयन या कठिन स्थानों पर पोस्टिंग के मामले में कोई विशेष रियायत नहीं दी जानी चाहिए। उनके आवास और अन्य ढांचागत सुविधाओं जैसी प्रशासनिक और तार्किक कठिनाइयों की ओर भी सुझाव दिए गए हैं।
ट्रांसजेंडर समुदाय को समान अवसर
एक अधिकारी के मुताबिक यह अधिनियम ट्रांसजेंडर समुदाय को समान अवसर प्रदान करने के लिए है। साथ ही, रक्षा बलों में रोजगार, चयन और योग्यता पर आधारित होता है, जो किसी भी समय भर्ती शुरू होने पर ट्रांसजेंडर लोगों पर समान रूप से लागू होगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कोई भी फैसला लेने से पहले कई अन्य मुद्दों पर भी विचार करना होगा। सेना को केवल रोजगार के अवसर के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सशस्त्र बलों में कोई भी ट्रांसजेंडर नहीं
वर्तमान में सशस्त्र बलों में कोई भी ट्रांसजेंडर कर्मी सेवारत नहीं है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर स्थायी समिति ने 3 अगस्त को राज्यसभा में अपनी रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि गृह मंत्रालय (एमएचए) को विस्तार पर विचार करना चाहिए। आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती की सुविधा के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
हालांकि मुंबई निवासी मनीष गिरी ने एक पुरुष के रूप में 7 साल पहले ईस्टर्न नेवल कमान के मरीन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में बतौर सिपाही ज्वाइन किया था। सेक्स चेंज कराने के बाद नेवी ने मनीष उर्फ सबी को बर्खास्त कर दिया था। सबी ने इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
