डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। भारत सरकार अगर राजकोषीय घाटे को कम करना चाहती है तो इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक से प्राप्त दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड लाभांश का उपयोग करना पड़ेगा। इससे आने वाले समय में उसे ‘रेटिंग समर्थन’ मिल सकता है। यह दावा रेटिंग एजेंसियों ने किया है।
बता दें कि आरबीआई के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बीजेपी केंद्र सरकार को 2.1 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने का फैसला किया है। यह केंद्रीय बैंक की ओर से केंद्र सरकार को दिया जानेवाला अब तक का सर्वाधिक लाभांश है। यह बजट में जताए गए 1.02 लाख करोड़ रुपये के लाभांश अनुमान से दोगुने से भी अधिक है।
गौरतलब है कि अंतरिम बजट में केंद्र की बीजेपी सरकार ने आरबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों से कुल 1.02 लाख करोड़ रुपये की लाभांश आय का अनुमान जताया था।
इस साल फरवरी में संसद में पेश अंतरिम बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है।
आरबीआई के अधिक लाभांश से राजकोषीय घाटे में कमी कुछ बातों पर निर्भर है। अंतिम बजट में विनिवेश जैसे क्षेत्रों से राजस्व प्राप्ति कम रहती या व्यय मद में अतिरिक्त आवंटन होता है, तो आरबीआई के अतिरिक्त लाभांश से घाटे में बहुत ज्यादा कमी नहीं आएगी।
केंद्र सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 प्रतिशत पर रहेगा। यह 2023-24 में 5.8 प्रतिशत था। राजकोषीय मजबूती की रूपरेखा के अनुसार, सरकारी व्यय और राजस्व के बीच का अंतर 2025-26 तक कम करके 4.5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है।
