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सुप्रीम कोर्ट का CAA पर रोक लगाने से इनकार, केंद्र को नोटिस जारी कर 8 अप्रैल तक मांगा जवाब

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हाईलाइट्स:
  • सुप्रीम कोर्ट फिलहाल सीएए पर कोई रोक नहीं लगा रहा
  • CJI ने कहा- नागरिकता देने के ल‍िए बुनियादी ढांचा नहीं
  • सरकार देगी सभी याचिकाओं पर 3 हफ्ते में जवाब

 

डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह करने वाले आवेदनों पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। सीजेआई ने कहा कि केन्द्र के पास नागरिकता देने के लिए बुनियादी ढांचा नहीं है। उन्हें त्रिस्तरीय कमेटी बनानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी को नागरिकता दी जाती है, तो याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की आजादी होगी। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ इस मामले में अब नौ अप्रैल को सुनवाई करेगी।

केंद्र ने मांगा समय

बता दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं 200 से ज्यादा याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि उन्हें 20 आवेदनों पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय चाहिए। इन आवेदनों में आग्रह किया गया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का शीर्ष अदालत द्वारा निपटारा किए जाने तक संबंधित नियमों पर रोक लगाई जानी चाहिए। मेहता ने पीठ से कहा कि यह (सीएए) किसी भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं छीनता।

 

याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकार्ताओं ने अपने आवेदन में कहा कि सीएए के तहत अधिसूचित नियम साफ तौर पर मनमाने हैं और केवल उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर व्यक्तियों के एक वर्ग के पक्ष में अनुचित लाभ देते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत सही नहीं है। 

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि नोटिफिकेशन 4 साल 3 महीने बाद जारी हुआ है। अगर नागरिकता देना शुरू हुआ तो उसे वापस लेना संभव नहीं होगा। ऐसे में नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जाए। स‍िब्‍बल ने कहा क‍ि कुछ लोगों को सिटिजनशिप दी गई है। अगर रोक नहीं लगाई गई तो इन याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने भी कहा क‍ि ये मामला संवैधानिक जांच का है।

बता दें कि संसद द्वारा विवादास्पद कानून पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र ने 11 मार्च को संबंधित नियमों की अधिसूचना के साथ नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त कर दिया था।

 

 


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