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‘स्मगल इन इंडिया’ का चमकता धंधा—बीजेपी के ‘नए भारत’ में तस्करों की बल्ले-बल्ले

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30,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई, लाखों गिरफ्तार

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई, नई दिल्ली। भारत में ‘मेक इन इंडिया’ का नारा तो गूंज रहा है, लेकिन तस्करों ने इसे ‘स्मगल इन इंडिया’ में बदल दिया है। पिछले पांच वर्षों (2020-2025) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने 25,000-30,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की, लेकिन गुजरात के बंदरगाहों से पंजाब की सीमाओं तक तस्करों का बेरोकटोक कारोबार बीजेपी सरकार के ‘ड्रग्स-मुक्त भारत’ के दावों को खोखला साबित करता है। रिपोर्ट से यह साफ है—जब्ती के आंकड़े चमक रहे हैं, मगर तस्करी का मायाजाल टूटने का नाम नहीं ले रहा।

भारत में नशीली दवाओं के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की सख्ती और ऑपरेशनों के बावजूद ड्रग्स का व्यापार लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते पांच वर्षों में (2020 से अप्रैल 2025 तक) गुजरात और महाराष्ट्र जैसे तटीय राज्यों से भारी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स की तस्करी पकड़ी गई है, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य खपत और तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में चिन्हित हुए हैं।

2021 से जून 2024 के बीच गुजरात में 87,000 किलो से अधिक ड्रग्स जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 9,600 करोड़ रुपए थी। 2024 में ही 7,303 करोड़ रुपए की नशीली दवाएं पकड़ी गईं, जिनमें से अधिकतर पंजाब भेजी जा रही थीं। एनसीबी और गुजरात पुलिस ने इस दौरान 2,600 से अधिक गिरफ्तारियां कीं। 2023 में महाराष्ट्र में 897 करोड़ की ड्रग्स जब्त की गई थी, लेकिन 2024 के पहले पांच महीनों में ही ये आंकड़ा बढ़कर 4,131 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह 360% की बढ़ोतरी है।

इन पांच वर्षों में देश में 3,000-4,000 करोड़ रुपये की हेरोइन पकड़ी गई। गुजरात में 500-1,000 करोड़ रुपये की हेरोइन, पंजाब में 1,500-2,000 करोड़ रुपये की 300 किलोग्राम हेरोइन, मुंबई में 200-300 करोड़ रुपये की कोकीन, और उत्तर प्रदेश में 100-200 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त हुई। तस्करों ने डार्कनेट और समुद्री रास्तों का सहारा लिया, और सरकार ‘सब चंगा सी’ का ढोल पीटती रही।

2021 में गुजरात का ‘मुंद्रा शॉक’

गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से 21,000 करोड़ रुपये की 3,000 किलोग्राम हेरोइन की जब्ती ने बीजेपी के ‘विकसित गुजरात’ पर सवाल खड़े किए। कुल 6,000-8,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई। पंजाब में 2,500-3,000 करोड़ रुपये, मुंबई में 300-500 करोड़ रुपये, और उत्तर प्रदेश में 200-300 करोड़ रुपये की जब्ती हुई। बंदरगाहों की कथित चौकसी तस्करों के सामने कागजी शेर साबित हुई।

2022 में समुद्री तस्करी का उभार

5,000-7,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद। गुजरात में कांडला से 1,439 करोड़ रुपये की 205.6 किलोग्राम हेरोइन सहित 8,500-9,000 करोड़ रुपये, पंजाब में 3,000-3,500 करोड़ रुपये, मुंबई में 400-600 करोड़ रुपये, और उत्तर प्रदेश में 300-400 करोड़ रुपये के ड्रग्स की जब्ती। तस्करों ने ड्रोन और समुद्री रास्तों का जाल बुना, जबकि सरकार आंकड़ों की माला जपने में मशगूल रही।

2023 में गिरफ्तारियां हुईं, मगर नतीजा सिफर

4,000-6,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई और इन मामलों में 1.32 लाख गिरफ्तारियां हुई हैं। गुजरात में 2,000-3,000 करोड़ रुपये, पंजाब में 3,500-4,000 करोड़ रुपये की 700 किलोग्राम हेरोइन, मुंबई में 500-700 करोड़ रुपये, और उत्तर प्रदेश में 400-600 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी गई। पंजाब में नशे पर बीजेपी की रैलियां जोरदार थीं, लेकिन तस्करी की जड़ें काटने का जज्बा गायब रहा।
कुल मिलाकर 2023 में जब्ती का आंकड़ा 25,000 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक था। इस दौरान 80 क्विंटल मेथामफेटामीन, 1,426 किलो कोकीन और 3,391 किलो मेफेड्रोन जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स बरामद किए गए।

2024 में कोकीन का ‘कोहराम’

पिछले साल 20,000-22,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई। अकेले गुजरात के अंकलेश्वर से 5,000 करोड़ रुपये की 518 किलोग्राम कोकीन सहित 5,500-6,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई, जबकि पंजाब में 2,500-3,000 करोड़ रुपये, मुंबई में 600-800 करोड़ रुपये, और उत्तर प्रदेश में 1,500 करोड़ रुपये की ड्रग्स। तस्करों का धंधा ‘अच्छे दिन’ की तरह चमक रहा है।

जनवरी-अप्रैल 2025: सिलसिला बरकरार

1,000-2,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स। गुजरात में 2.76 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स, मुंबई में 60-115 करोड़ रुपये की कोकीन और कैनबिस, पंजाब में 100-200 करोड़ रुपये, और उत्तर प्रदेश में 50-100 करोड़ रुपये।

गुजरात के बंदरगाह, पंजाब की सीमाएं, और मुंबई के हवाई मार्ग तस्करों के लिए सोने की खान बने हैं। बीजेपी के ‘विश्वगुरु’ बनने के सपने में ड्रग्स तस्करी का यह काला अध्याय शर्मिंदगी का सबब है। जब्ती के आंकड़े चमक रहे हैं, लेकिन तस्करों की बेपरवाही रोकने के लिए सरकार को प्रचार की स्क्रिप्ट छोड़कर जमीनी जंग लड़नी होगी।

स्रोत: एनसीबी, डीआरआई, UNODC, इंटरपोल,


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