प्रहरी संवाददाता, मुंबई। कोरोना वायरस की महामारी ने एक तरफ देश के गरीबों का जीना मुहाल कर दिया, तो वहीं दूसरी ओर अमीरों की आय में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। पहले दो साल में दुनिया में 99 प्रतिशत लोगों की आमदनी में गिरावट आई है और 16 करोड़ से अधिक लोग ‘गरीबों’ की श्रेणी में आ गए हैं। वहीं, दूसरी तरफ महामारी काल में दुनिया के दस सबसे अमीर व्यक्तियों की संपत्ति प्रतिदिन 1.3 अरब डॉलर (9,000 करोड़ रुपये) की दर से बढ़कर 1,500 अरब डॉलर (111 लाख करोड़ रुपये से अधिक) हो गई।
एक सेकंड में 15000 डॉलर की संपत्ति बढ़ी
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क्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बूचर का कहना है कि दुनिया के शीर्ष दस अमीरों के पास सबसे गरीब 3.1 अरब लोगों की तुलना में छह गुना अधिक संपत्ति है। धनी व्यक्तियों की संपत्ति महामारी के पहले दो वर्षों के दौरान 15,000 डॉलर प्रति सेकंड की दर से बढ़ी है। अगर ये दस व्यक्ति अपनी संपत्ति का 99.999 प्रतिशत गंवा भी देते हैं, तो भी वे दुनिया के 99 प्रतिशत लोगों से ज्यादा अमीर रहेंगे।
84 साल तक खत्म नहीं होगी भारतीय अमीरों की संपत्ति
रिपोर्ट के अनुसार, अगर 10 सबसे अमीर भारतीय अरबपतियों को प्रतिदिन 10 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करने हों, तो उनकी वर्तमान संपत्ति 84 साल में खत्म होगी। आर्थिक असमानता पर ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया कि 142 भारतीय अरबपतियों के पास कुल 719 अरब डॉलर (53 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की संपत्ति है। देश के सबसे अमीर 98 लोगों की कुल संपत्ति, सबसे गरीब 55.5 करोड़ लोगों की कुल संपत्ति के बराबर है।
महिलाओं को 800 अरब डॉलर की कमाई का नुकसान
रिपोर्ट कहती है कि साल 2020 में महिलाओं को सामूहिक रूप से 800 अरब डॉलर की कमाई का नुकसान हुआ। कोरोना से पहले वर्ष 2019 की तुलना में अब 1.3 करोड़ कम महिलाओं के पास रोजगार नहीं है। साल 2021 में भारत में 84 प्रतिशत परिवारों की आय में गिरावट आई है, जबकि करीब 28 फीसदी महिलाओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
25 साल तक हर बच्चे को मिले सकेगी शिक्षा
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में अरबपतियों की संख्या 39 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। देश के 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति से 25 साल तक देश के हर बच्चे को स्कूली शिक्षा एवं उच्च शिक्षा दी जा सकती है। इसके अलावा, यदि सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगा दिया जाए, तो देश को लगभग 17.7 लाख अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर मिल सकते हैं।
चार सेकंड में एक व्यक्ति की मौत
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन के पहले दिन जारी अपनी रिपोर्ट ‘इनइक्वलिटी किल्स’ में ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने कहा कि असमानता की वजह से प्रतिदिन कम से कम 21,000 लोग या प्रति चार सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य देखभाल, लिंग आधारित हिंसा, भूख और जलवायु की वजह से वैश्विक स्तर पर होने वाली मौतों पर निष्कर्ष निकाला गया है।
