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इस साल पार्टियों को मिला 1100 करोड़ रुपये का चुनावी फंड

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इस साल पार्टियों को मिला 1100 करोड़ रुपये का चुनावी फंड
चुनाव प्रचार पर विभिन्न दलों ने किया भारी खर्च: अध्ययन

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। भारत का चुनाव अब कॉर्पोरेट कल्चर में रंग चुका है। जिस पार्टी के पास जितना अधिक चुनावी फंड जमा होगा, वह जमकर खर्च करेगी और कॉर्पोरेट फंड की मदद से अपनी भी सत्ता बनाएगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस सहित उन्नीस राजनीतिक दलों ने वर्ष 2021 में पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों के दौरान कुल 1,100 करोड़ रुपये का चुनावी फंड हासिल किया है। चुनाव पर इन दलों ने 500 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया है। इसमें एक बड़ा हिस्सा स्टार प्रचारकों के लिए विज्ञापनों और यात्रा मद पर खर्च किया गया है। शुक्रवार को एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

भाजपा को 612 करोड़ रुपये का चुनावी फंड, खर्च किए 252 करोड़
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को सबसे ज्यादा 611.69 करोड़ रुपये का चुनावी फंड मिला है। भाजपा ने इसमें से 252 करोड़ रुपये खर्च किए।

भाजपा ने मीडिया में विज्ञापन सहित प्रचार पर 85.26 करोड़ रुपये और स्टार प्रचारकों तथा अन्य नेताओं की यात्रा पर 61.73 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

कांग्रेस को 194 करोड़ का फंड, खर्च किए 86 करोड़
एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया कि कांग्रेस को 193.77 करोड़ रुपये का चुनावी फंड मिला है, जिसमें से पार्टी ने 85.62 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कांग्रेस ने प्रचार पर 31.45 करोड़ रुपये और यात्रा खर्च के लिए 20.40 रुपये खर्च किए हैं।

तीसरे स्थान पर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) रही। पार्टी को 134 करोड़ रुपये की रकम मिली। इसमें से कुल 114.14 करोड़ रुपये खर्च किए। पार्टी ने प्रचार पर 52.144 करोड़ रुपये और अपने स्टार प्रचारकों तथा अन्य नेताओं की यात्रा के लिए 2.41 करोड़ रुपये खर्च किए।

भाकपा को केवल 8 करोड़ रुपये मिले
रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को कुल 79.24 करोड़ रुपये, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 56.32 करोड़ रुपये, अन्नाद्रमुक को 14.46 करोड़ रुपये और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को 8.05 करोड़ रुपये मिले।
रिपोर्ट में कहा गया है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के दौरान 19 राजनीतिक दलों को कुल 1,116.81 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा मिला था। इसमें से कुल 514.30 करोड़ रुपये खर्च हुआ है।


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