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सुरक्षा नियमों की चूक या सुनियोजित साजिश: कॉकपिट की इमरजेंसी कुल्हाड़ी से ही प्लेन क्रैश कराने की थी तैयारी, जांच में खुले कई राज

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✍️​डिजिटल न्यूज डेस्क, दुबई/तेल अवीव | ​फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही उड़ान एफजेड-1073 (FZ1073) में हुए जानलेवा हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस खौफनाक साजिश की परतें खुलने लगी हैं। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि हाई-सिक्योरिटी वाले कॉकपिट में धारदार हथियार कैसे पहुंचा।

यूएई अभियोजन पक्ष और विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हमलावर सह-चालक (को-पायलट) हम्माम अल-हम्मामी बाहर से कोई हथियार लेकर नहीं घुसा था, बल्कि उसने विमान के कॉकपिट में पहले से मौजूद ‘क्रैश एक्स’ (इमरजेंसी कुल्हाड़ी) का इस्तेमाल किया था। अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना के समय केबिन का दरवाजा तोड़ने अथवा आग पर काबू पाने के लिए हर वाणिज्यिक विमान के कॉकपिट में यह कुल्हाड़ी रखना अनिवार्य होता है। सुरक्षा के इसी कानूनी प्रावधान को आरोपी ने हथियार बना लिया।

​जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस हमले के पीछे स्पष्ट रूप से चरमपंथी मानसिकता और राजनीतिक नफरत मुख्य कारण बनकर उभरी है। विमान में 170 से अधिक यात्री और क्रू सवार थे, जिनमें भारी संख्या में इजरायली नागरिक शामिल थे। यूएई के प्रॉसिक्यूटर जनरल हमद सैफ अल शमसी ने इसे सीधे तौर पर ‘आतंकी हमला करने की कोशिश’ करार दिया है।

सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र में पहुंचते ही जब मुख्य कैप्टन की नजर हटी, तभी ओमानी नागरिक हम्मामी ने कुल्हाड़ी से उस पर जानलेवा वार कर दिया ताकि वह विमान का पूरा नियंत्रण छीनकर उसे सीधे क्रैश करा सके। इसके चलते विमान 30 सेकंड में 16,625 फीट नीचे आ गिरा था, जिसे यात्रियों और अन्य क्रू मेंबर्स ने समय रहते आरोपी को दबोचकर नाकाम कर दिया।

​इस घटना ने एयरलाइन की आंतरिक स्क्रीनिंग और खुफिया तंत्र की घोर विफलता को भी उजागर कर दिया है। ओमान के साथ इजरायल के औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और इजरायली नियमों के मुताबिक ऐसे देशों के पायलटों को उनके नागरिकों वाली उड़ानों पर तैनात नहीं किया जा सकता।

इसके बावजूद हम्मामी को तेल अवीव की संवेदनशील उड़ान कैसे सौंपी गई, यह गंभीर जांच का विषय है। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2025 में रॉयल एयर मारोक में तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद उसके संदिग्ध आचरण के चलते नौकरी का आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके बावजूद फ्लाईदुबई में उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कैसे पास हुआ, इसकी पड़ताल में यूएई के साथ इजरायली एजेंसियां भी जुटी हैं।


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