रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आरसीटी) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
✍🏻 प्रहरी संवाददाता, पटना। बिहार की राजधानी पटना में रेलवे दावा न्यायाधिकरण (आरसीटी) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8.02 करोड़ रुपये की 24 अचल संपत्तियों को कुर्क किया है। 21 मार्च 2025 को ईडी ने अधिवक्ता विद्यानंद सिंह, अधिवक्ता परमानंद सिन्हा, अधिवक्ता कुमारी रिंकी सिन्हा, अर्चना सिन्हा, विजय कुमार, निर्मला कुमारी और मेसर्स हरिजग बिजनेस एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए, 2002) के तहत अभियोजन शिकायत दर्ज की। पटना की विशेष अदालत ने इस पर संज्ञान भी ले लिया है।
कैसे हुआ घोटाला?
यह मामला सीबीआई, एसीबी, पटना द्वारा दर्ज एफआईआर से उजागर हुआ, जिसमें रेलवे अधिकारियों और वकीलों पर मृतक दावा राशि की हेराफेरी का आरोप है। आरोपियों ने 900 से अधिक दावों का निपटारा किया, लेकिन दावेदारों को उनकी पूरी राशि नहीं मिली। जांच में सामने आया कि वकीलों ने फर्जी बैंक खाते खुलवाए, रेलवे से मिली रकम में बड़ा हिस्सा खुद हड़प लिया और इसे बेनामी संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया।
जांच में क्या सामने आया?
प्रवर्तन निदेशालय ने आईपीसी, 1860 की धारा 120-बी, 420 और पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 7 ए के तहत जांच शुरू की।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि 10.27 करोड़ रुपये वकीलों और उनके सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इस काले धन से पटना, नालंदा, गया और नई दिल्ली में 24 संपत्तियां खरीदी गईं। इस मामले में अधिवक्ता विद्यानंद सिंह, परमानंद सिन्हा और विजय कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे न्यायिक हिरासत में हैं।
छापेमारी और आगे की कार्रवाई
इससे पहले ईडी ने पटना, गया और दिल्ली में कई ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज जब्त किए थे। इस मामले में वकीलों और जज आर.के. मित्तल से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसियां अब इस घोटाले में अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों और वकीलों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। रेलवे दावा घोटाले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
