ताज़ा खबर
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरलाइफस्टाइलसंपादकीय

‘वर्षा’ बंगला: सत्ता का प्रतीक या विवादों का अड्डा?

Share

सबसे बड़ा रियल एस्टेट ड्रामा

– आर आर यादव
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘वर्षा’ बंगला महज एक सरकारी निवास नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक बन चुका है। जब भी मुख्यमंत्री बदलते हैं, इस बंगले की किस्मत भी बदल जाती है। लेकिन इस बार मामला सिर्फ बदलाव का नहीं, बल्कि बंगले के इर्द-गिर्द घूमती सियासी पटकथा का भी है। एकनाथ शिंदे इसे छोड़ने को तैयार नहीं, और देवेंद्र फडणवीस इसे लेने की जल्दी में नहीं। इस बंगले की गूंज अब विधानसभा से लेकर विपक्षी नेताओं के चुटीले बयानों तक में सुनाई दे रही है।

 

अंधविश्वास बनाम राजनीति

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया कि ‘वर्षा’ बंगले में “अंधविश्वास” और “काले जादू” से जुड़ी गतिविधियाँ हुई हैं, जिसके चलते देवेंद्र फडणवीस वहां जाने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके स्वास्थ्य में गिरावट आई थी, और वे ज्यादा दिन बंगले में नहीं रह सके। इसी कारण फडणवीस भी बंगले को हाथ लगाने से बच रहे हैं।

हालांकि, फडणवीस ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे तभी बंगले में शिफ्ट होंगे, जब शिंदे इसे खाली करेंगे। अब सवाल उठता है कि आखिर शिंदे इसे छोड़ क्यों नहीं रहे? क्या यह महज संयोग है, या फिर इसके पीछे राजनीति का कोई बड़ा खेल छिपा है?

शिंदे की बंगले में दिलचस्पी या सत्ता की मजबूरी?

एकनाथ शिंदे और भाजपा के रिश्तों में हाल ही में कई मुद्दों को लेकर असहमति देखने को मिली है। शिंदे के मुख्यमंत्री रहते हुए लिए गए कुछ फैसलों की समीक्षा फडणवीस सरकार ने शुरू कर दी है। जालना जिले में 900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की जांच और एसटी महामंडल के बस कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने जैसे कदम, शिंदे गुट के लिए झटके की तरह हैं।

इस बीच, मुंबई के ‘नंदनवन’ बंगले में मरम्मत कार्य चल रहा है, जो शिंदे के लिए नया सरकारी निवास होगा। लेकिन, क्या यह देरी असली कारण है, या फिर शिंदे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए ‘वर्षा’ को छोड़ने से बच रहे हैं?

संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति पर तकरार

फडणवीस और शिंदे के बीच मतभेद संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति में भी दिखे। रायगढ़ में राकांपा विधायक अदिति तटकरे और नासिक में भाजपा नेता गिरीश महाजन को संरक्षक मंत्री बनाने पर शिंदे ने आपत्ति जताई। नतीजा यह निकला कि इन नियुक्तियों को फिलहाल रोक दिया गया है।

सरकारी बैठकों में बढ़ती दूरियाँ

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच मतभेद सरकारी बैठकों में भी साफ झलकने लगे हैं। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में शिंदे की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में और चर्चाएँ छेड़ दीं। अब शिंदे ने अपनी अलग से समन्वय समिति बनाकर बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों के बीच सत्ता का संतुलन बिगड़ रहा है।

फडणवीस की ‘बेटी की परीक्षाओं’ वाली दलील

फडणवीस ने बंगले में शिफ्ट न होने के पीछे अपनी बेटी की परीक्षाओं का हवाला दिया है। उनका कहना है कि वे तब तक अपने मौजूदा निवास ‘सागर’ बंगले में ही रहेंगे, जब तक उनकी बेटी की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बहानेबाजी माना जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि अगर वास्तव में ऐसा होता, तो फडणवीस को ‘वर्षा’ बंगले को लेकर बार-बार सफाई देने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

क्या ‘वर्षा’ बंगला अशुभ है?

पिछले कुछ वर्षों में कई मुख्यमंत्री इस बंगले में आए और गए, लेकिन अंधविश्वास की बातें कभी इतनी प्रमुखता से नहीं उठी थीं। अगर वास्तु दोष या काले जादू की बात सच होती, तो क्या भाजपा इसे नजरअंदाज कर देती? क्या यह बंगला महाराष्ट्र के सियासी समीकरणों का बैरोमीटर बन चुका है?

बंगला एक, सवाल अनेक

‘वर्षा’ बंगला इस समय महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा रियल एस्टेट ड्रामा बन चुका है। यह सिर्फ मुख्यमंत्री का सरकारी आवास नहीं, बल्कि सत्ता के लिए रस्साकशी का प्रतीक बन गया है। शिंदे इसे छोड़ने को तैयार नहीं, फडणवीस वहाँ जाने को तैयार नहीं, और विपक्ष इस पूरे मुद्दे को भुनाने में लगा है।

आखिर यह ड्रामा कब खत्म होगा?

क्या फडणवीस ‘वर्षा’ में शिफ्ट होंगे, या फिर कोई नया राजनीतिक मोड़ आएगा? महाराष्ट्र की जनता इस खेल को दिलचस्पी से देख रही है, और शायद इस ड्रामे का अगला एपिसोड जल्द ही सामने आए!

 


Share

Related posts

तमिलनाडु में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश!

Amit Kumar

मुस्लिम देशों ने दी यहूदी देश को चेतावनी, तनाव चरम पर

samacharprahari

नहीं लगा टीका, तो एयर इंडिया के पायलट करेंगे काम बंद

samacharprahari

आप सांसद संजय सिंह के आवास पर ED की छापेमारी

Prem Chand

पश्चिम रेलवे 21 सितंबर से उपनगरीय खंड पर 500 विशेष लोकल ट्रेनें चलाएगी

samacharprahari

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बढ़ेगी देशमुख की मुश्किलें

samacharprahari