ताज़ा खबर
OtherPoliticsTop 10ताज़ा खबरबिज़नेसभारतराज्य

बजट 2026-27: आम जनता के बजाय बड़े उद्योग और विदेशी निवेश पर जोर

Share

✍🏻 प्रहरी संवाददाता मुंबई, नई दिल्ली | चुनावी आहट और वैश्विक अस्थिरता के दबाव के बावजूद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लोकलुभावनवाद के बजाय राजकोषीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी है। लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम बजट का केंद्र बिंदु विनिर्माण, कृषि और छोटे उद्योगों को सशक्त बनाना है। डिजिटल बुनियादी ढांचे और विदेशी निवेश पर बड़े दांव के साथ, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसका लक्ष्य केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि भविष्य की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था है। जहां प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘विकसित भारत’ की ऐतिहासिक नींव बताया, वहीं विपक्ष ने इसे आम जनता की उम्मीदों के साथ छलावा करार दिया है। विपक्ष ने इसे आम लोगों की अपेक्षाओं से अलग बताते हुए आलोचना की।

विपक्ष का कहना है कि बजट में कुल 53.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें पूंजीगत व्यय, बड़े उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक निवेश को प्राथमिकता दी गई है, जबकि मुफ्त योजनाओं और नकद हस्तांतरण का कोई जिक्र नहीं है।

सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में निकट भविष्य में चुनाव होने हैं। इसके बावजूद बजट में मुफ्त योजनाओं या बड़े नकद हस्तांतरण से परहेज करते हुए राजकोषीय मजबूती को प्राथमिकता दी गई।

बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.22 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की गई है। पिछले वित्त वर्ष का पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये था। सरकार ने सात क्षेत्रों औषधि, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ-खनिज, रसायन, पूंजीगत वस्तुएं, वस्त्र और खेल सामग्री में विनिर्माण को प्राथमिकता दी। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रिज़र्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्थानों से लाभांश और अधिशेष के रूप में 3.16 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है, जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है।

कृषि क्षेत्र में बजट में पशुधन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाली फसलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई योजनाओं की घोषणा की गई। पर्यटन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पारिस्थितिकी रूप से टिकाऊ मार्गों और 15 पुरातात्विक स्थलों के उन्नयन का प्रस्ताव रखा गया।
छोटे और मझोले उद्यमों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई वृद्धि कोष स्थापित किया गया। सीमा शुल्क व्यवस्था को सरल बनाते हुए कई छूटों की घोषणा की गई। 17 कैंसर दवाओं को सीमा शुल्क से मुक्त किया गया और व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित वस्तुओं पर शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत किया गया।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक डेटा सेंटर कंपनियों को 20 साल तक कर छूट देने का प्रस्ताव रखा गया। विदेशी ‘क्लाउड’ कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली डेटा सेंटर सेवाओं पर 15 प्रतिशत की छूट का भी प्रावधान किया गया। इससे निवेशकों को कर निश्चितता और परिचालन दक्षता मिलने की उम्मीद है।

बजट पेश होने के दिन शेयर बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। सेंसेक्स 1,547 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 495 अंकों की कमी दर्ज की गई। वायदा एवं विकल्प कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर बढ़ाने का प्रस्ताव इसका कारण बताया गया।

राजकोषीय मोर्चे पर सरकार ने अगले वित्त वर्ष में घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित करने और ऋण-जीडीपी अनुपात घटाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये की सकल बाजार उधारी योजना बनाई गई है।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत को निर्यात बढ़ाने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।

विपक्ष ने बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें आम जनता के लिए कोई ठोस राहत नहीं है और यह केवल बड़े उद्योगों और निवेशकों को प्राथमिकता देता है।


Share

Related posts

नांदेड़ के अस्पताल में 48 घंटे में 31 मौत, 16 मासूम बच्चे भी शामिल

Prem Chand

विधायक ने सीएम को लिखा पत्र, कहा- भाजपा से दोस्ती करना ठीक होगा

samacharprahari

‘कफन’ को यहाँ से पढ़ें…प्रेमचंद जयंती पर विशेष

Prem Chand

स्कूल मालिक ने टीचर का किया रेप

Prem Chand

हमीरपुर में ट्रक ने बाइक सवार को कुचला

Prem Chand

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से एक करोड़ रुपये की ठगी

Prem Chand