माल्या की याचिका पर सुनवाई से कोर्ट का इनकार
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई | बॉम्बे हाई कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि कोई भी व्यक्ति जो भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बच रहा हो, वह विदेश में रहते हुए घरेलू कानूनों के तहत राहत की मांग नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि जब तक वह भारत लौटकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन नहीं आता, तब तक उसकी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखद की खंडपीठ ने गुरुवार को दो टूक कहा कि जब तक माल्या भारत लौटकर यहां की कानूनी प्रक्रिया के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करते, तब तक अदालत ‘फ्यूजिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट’ (FEOA) की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी दलीलों पर विचार नहीं करेगी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान माल्या के वकील से कहा, “आपको वापस आना ही होगा… यदि आप नहीं आ सकते, तो हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।”
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति भारतीय न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से भागकर उसी कानून के तहत राहत की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने माल्या को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि वे कब भारत लौट रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि माल्या ने 2018 के भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की संवैधानिक वैधता और विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि माल्या ने ये याचिकाएं तभी दायर कीं जब लंदन में उनके प्रत्यर्पण की कार्यवाही अंतिम चरण में पहुंच गई। उन्होंने तर्क दिया कि माल्या जानबूझकर भारतीय क्षेत्राधिकार से बच रहे हैं।
