प्रहरी सवांददाता, नई दिल्ली, ०७/०३/२०२४ । चुनावी बॉन्ड का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इसी मामले के बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें राष्ट्रीय पार्टियों के फंडिंग के स्त्रोतों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2004 से 2023 के बीच सभी राष्ट्रीय दलों ने अज्ञात स्त्रोतों से 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय एकत्र की है। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चुनाव आयोग को दायर की गई दलों की ऑडिट और दान रिपोर्ट के विश्लेषण से साफ जाहिर है कि काफी हद तक धन के स्त्रोत अज्ञात हैं।
जून 2013 में केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले के कारण राष्ट्रीय दलों को आरटीआई के तहत लाया गया था, लेकिन इन दलों ने इस निर्णय का पालन नही किया है। मौजूदा कानून के तहत केवल आरटीआई से ही जनता को सारी जानकारी प्राप्त हो सकती है। राजनीतिक दलों को रु 20,000 से अधिक के दान देने वाले दानदाताओं का विवरण चुनाव आयोग को वार्षिक जमा करना आवश्यक है। दान रिपोर्ट में दलों को दान देने वाले दानदाता का नाम, पता, पैन, राशि और भुगतान का माध्यम आदि जानकारी देनी होती है। यह दलों के आय का एकमात्र ज्ञात स्त्रोत है। अज्ञात स्त्रोतों की जानकारी दलों द्वारा घोषित आयकर विवरण से लिया जाता है। 20,000 रुपये से कम दान का विवरण ना ऑडिट रिपोर्ट में और ना ही दान रिपोर्ट में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। इन दानों को अज्ञात स्त्रोत माना जाता है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान भाजपा ने अज्ञात स्त्रोंतों से रु. 1400.2398 करोड़ की आय घोषित की है। कांग्रेस ने अज्ञात स्त्रोतों से कुल रु. 315.114 करोड़ प्राप्त किया है। 6 राष्ट्रीय दलों को अज्ञात स्त्रोतों से रु 1832.8788 करोड़ प्राप्त हुए, जिसमें से 82.42% (रु 1510.6199 करोड़) का दान चुनावी बॉन्ड से मिला है। अज्ञात स्त्रोतों के जरिए कांग्रेस और माकपा ने 7.46% (रु 136.7986 करोड़) की राशि कूपन की बिक्री से अर्जित की है। 6 राष्ट्रीय दलों ने स्वैच्छिक योगदान (रु 20,000 से कम) से 10% (रु 183.2811 करोड़) की राशि एकत्रित किए हैं।
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