- 3 साल में 35 हजार स्टूडेंट्स ने की आत्महत्या, लेकिन इसमें से SC-ST के कितने सरकार नहीं बता पाई
- भारत में इस साल भी छात्रों की आत्महत्या के मामले तेजी से दर्ज किए गए
डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/नई दिल्ली।
देश में साल 2019 से लेकर साल 2021 के बीच अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कम से कम 35 हजार छात्रों ने आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाई है। महाराष्ट्र में इस दौरान 4,969 स्टूडेंट्स ने मौत को गले लगाया।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री अब्बैया नारायणस्वामी ने लोकसभा में यह जानकारी दी। मंत्री जनता दल (यूनाइटेड) नेता डॉ. आलोक कुमार सुमन के एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
संसद में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री से यह पूछा गया था कि जातिगत भेदभाव की वजह से कितने SC-ST छात्रों ने आत्महत्या की? उन्होंने ये तो बताया कि वर्ष 2019 से 2021 के बीच 35 हजार स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की, लेकिन इसमें से कितने स्टूडेंट्स SC-ST के हैं, वे यह नहीं बता पाए।
उन्होंने सदन में कहा, ‘देश में सामाजिक भेदभाव के कारण आत्महत्या करने वाले एससी, एसटी छात्रों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है।’
वर्ष 2019 में 10,335 एससी/एसटी छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई वर्ष 2020 में 12,526 एससी/एसटी छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई वर्ष 2021 में 13,089 एससी/एसटी छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है। राज्य में कम से कम 1,834 छात्रों को अपनी जान लेने के लिए मजबूर किया गया।
वर्ष 2020 और वर्ष 2019 में भी, महाराष्ट्र इस सूची में टॉप पर था। राज्य में क्रमशः 1,648 और 1,487 छात्रों ने आत्महत्या की थी।
