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मंगल ग्रह का सैंपल लाने वाले मिशन पर क्यों छाए संकट के बादल!

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हाइलाइट्स

  • नासा के मंगल सैंपल रिटर्न मिशन पर संकट के बादल
  • इस मिशन की लागत नाटकीय ढंग से बढ़ी है
  • बढ़ी हुई लागत से अन्य मिशन पर भी हो सकता है असर 

 

डिजिटल न्यूज डेस्क, वॉशिंगटन। नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिक मंगल ग्रह के चट्टानी नमूने को वापस पृथ्वी पर लाना चाहते हैं। नासा अब तक के सबसे जटिल अंतरिक्ष मिशन में से एक पर कई साल से काम कर रहा है। चट्टानों का सैंपल इकट्ठा करने के लिए नासा का पर्सीवरेंस रोवर मंगल ग्रह पर मौजूद है।

पर्सीवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह की चट्टानों के सैंपल को टाइटेनियम ट्यूब में भरा है। वैज्ञानिक इन सैंपल को वापस लाकर इसमें जीवन के सबूत खोजना चाहते हैं। धरती के वायुमंडल में इस सैंपल को एक पैराशूट के जरिए 2033 तक उतारा जाएगा। नासा का मंगल सैंपल रिटर्न मिशन पहला मिशन होगा, जब रॉकेट किसी दूसरे ग्रह से उड़ान भरेगा, लेकिन अब सबसे बड़े अंतरिक्ष मिशन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

दरअसल, इस मिशन की लागत बढ़ गई है। नासा के एक रिव्यू पैनल ने चेतावनी दी है कि इस मिशन पर पहले 4.4 अरब डॉलर खर्च होने थे, जो अब बढ़कर 8-11 अरब डॉलर हो गई है। इस मिशन के कारण नासा के कई अन्य मिशन रद्द किए जा सकते हैं। पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगल से सैंपल लाने का मूल बजट अवास्तविक है और उपलब्ध फंड के साथ इस मिशन को अंजाम नहीं दिया जा सकता। वर्तमान में कोई विश्वसनीय, सुसंगत टेक्नोलॉजी नहीं है, जिससे 4 अरब डॉलर की राशि से इस मिशन को पूरा किया जा सके। बोर्ड के निष्कर्ष के मुताबिक मिशन 4 अरब डॉलर में पूरा नहीं हो सकता।

दूसरे मिशन पर पड़ेगा असर

रिपोर्ट के अनुसार, नासा के दूसरे मिशन को स्थगित या फिर रद्द करने की संभावना बनी हुई है। वैज्ञानिक इस बात से परेशान हैं कि मंगल का मिशन शुक्र के अध्ययन से जुड़ी परियोजनाओं को रद्द कर सकता है। वैज्ञानिक शुक्र ग्रह के अध्ययन से यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह ग्रह पृथ्वी जैसा क्यों नहीं बन पाया। इसके अलावा ऊपरी वायुमंडल का अध्ययन करने वाले मिशन में भी इस कारण देरी हो सकती है। आयोवा यूनिवर्सिटी के प्लाज्मा भौतिक विज्ञानी एलीसन जेन्स ने कहा, ‘आप हमारे विज्ञान की जीवनधारा की धमनी को काट रहे हैं।”

 


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