दोषसिद्धि से हो जाएंगे अयोग्य: एडीआर
प्रहरी संवाददाता, मुंबई। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने कहा है कि देश के कुल 363 सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक आरोपों को लेकर कार्रवाई जारी है। इन मामलों में दोषसिद्धि होने पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत इन्हें अयोग्य करार दिया जाएगा। केंद्र और राज्यों में 39 मंत्रियों ने भी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा आठ के तहत दर्ज आपराधिक मामलों की घोषणा की है। भारतीय जनता पार्टी में सबसे अधिक 83, कांग्रेस में 47 और तृणमूल कांग्रेस में 25 सांसदों और विधायकों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं।

बता दें कि कानून की धारा आठ की उप-धाराएं (1), (2) और (3) में प्रावधान है कि इनमें से किसी भी उप-धारा में उल्लिखित अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा और उनकी रिहाई के बाद से छह साल की और अवधि के लिए वह अयोग्य बना रहेगा। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (1), (2) और (3) के तहत सूचीबद्ध अपराध गंभीर, जघन्य प्रकृति के हैं।
एडीआर और ‘नेशनल इलेक्शन वाच’ ने वर्ष 2019 से वर्ष 2021 तक 542 लोकसभा सदस्यों और 1,953 विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण किया है। एडीआर के मुताबिक 2,495 सांसदों, विधायकों में से 363 (15 प्रतिशत) ने घोषणा की है कि उनके खिलाफ कानून में सूचीबद्ध अपराधों के लिए अदालतों द्वारा आरोप तय किए गए हैं। इनमें 296 विधायक और 67 सांसद हैं।
एडीआर ने कहा कि राजनीतिक दलों में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में ऐसे सांसदों, विधायकों की संख्या सबसे अधिक 83 है। कांग्रेस में 47 और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में 25 सांसद व विधायक हैं। मौजूदा लोकसभा के 24 सदस्यों के खिलाफ कुल 43 आपराधिक मामले लंबित हैं और 111 मौजूदा विधायकों के खिलाफ कुल 315 आपराधिक मामले 10 साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं।
