अनुदान की रकम नहीं हो रही खर्च
नानासाहेब लोखंडे, शिर्डी। भारत में कोरोना की दूसरी लहर गंभीर हो रही है। देश में कोहराम मचा है। कोरोना के नए वैरिएंट से 40 देशों की चिंता भी बढ़ गई थी, हालांकि विदेशों ने भारत में दूसरी लहर के बेकाबू होते ही फौरन मदद के हाथ बढ़ाए, लेकिन भारत सरकार और न ही राज्य सरकारें कोरोना से निबटने के लिए पूरी तरह से तैयार कर पाई हैं। विश्व बैंक समेत दुनिया भर से अनुदान मिल रहे हैं, लेकिन रिसर्च के नाम पर सरकार ने केवल 100 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं।
बता दें कि एक प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र पर सप्ताह में 120 डोज दिए जाते हैं। पिछले दो सप्ताह से उप केंद्रों को केवल 60 डोज ही दिए जा रहे हैं। लगभग 50 हजार लोग एक प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े हैं। डोज देने की यही गति रही तो पांच साल में भी 100 प्रतिशत लोगों को कोविशील्ड और कोवैक्सीन के डोज नहीं दे पाएगी सरकार। अहमदनगर (महाराष्ट्र) जिले के जामखेड में डॉ. रवि आरोडे का अस्पताल है। वे कोरोना मरीजों का मुफ्त में उपचार करते हैं। अब तक उन्होंने 5 हजार से अधिक कोरोना मरीज ठीक किए हैं। उनका कहना है कि मरीज रेमडेसिवीर इंजेक्शन के बिना ही ठीक हो जाते हैं। हम मरीजों को एंटीबायोटिक दवाइयां देते हैं।
अनुदान की रकम कहां खर्च हुई
सूत्रों के मुताबिक, विश्व बैंक ने भारत सरकार को 800 से 950 अरब डॉलर की मदद की है, लेकिन रिसर्च के नाम पर केंद्र सरकार ने केवल 100 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं। कोरोना से निबटने के लिए न तो केंद्र सरकार गंभीर नजर आती है और न ही राज्य सरकारें। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पास अब तक परीक्षण किए गए सभी मरीजों के डेटा को उपलब्ध कराने की मांग 300 हेल्थ चिकित्सकों व वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है, लेकिन अब तक सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है।
कहां से आई कितनी मदद
1) वर्ल्ड बैंक 7600 करोड़
कोरोना मरीजों की अच्छी जांच हो सके, कोविड अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और लैब इमारत का निर्माण किया जा सके।
2) ब्रिटेन
ऑॅक्सिजन कॉन्सट्रेटर्स
3) फ्रान्स
मेडिकल उपकरण, वेंटीलेटर, ऑक्सिजन, 8 ऑक्सिजन जनरेटर
4) रूस
ऑक्सिजन कॉन्सेट्रेटर, वेंटीलेशन उपकरण, बेड साईड मॉनिटर, दवाइय़ां
5) ऑस्ट्रेलिया
509 वेंटीलेटर, 10 लाख सर्जिकल मास्क, 1 लाख सर्जिकल गाउन, 1 लाख गॉगल्स, 1 लाख जोड़े, 20 हजार फेस शील्ड
