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‘नोट छापने की मशीन’ नहीं होने चाहिए अस्पतालः सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। देश के अस्पतालों के रवैये और रियल एस्टेट के काम करने के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में अस्पताल मानवता की सेवा करने के बजाए बड़े रियल एस्टेट उद्योग की तरह हो गए हैं। न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवासीय इलाकों में दो-तीन कमरे के फ्लैट में चलने वाले ‘नर्सिंग होम’ आग और भवन सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए उन्हें बंद किया जाना चाहिए।

अस्पताल बड़े उद्योग बन गए
जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस एम. आर. शाह की पीठ ने कहा, ‘अस्पताल कठिनाई के समय में रोगियों को राहत प्रदान करने के लिए होते हैं, न कि नोट छापने की मशीन होते हैं। आपदा के इस समय में अस्पताल बड़े उद्योग बन गए हैं और ‘आवासीय कॉलोनी में दो-तीन कमरे के फ्लैट से चलने वाले इस तरह के नर्सिंग होम को काम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।’ कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है, जब देशभर के अस्पतालों पर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लापरवाही और इलाज के लिए मनमाने चार्ज वसूलने के आरोप लगे हैं।


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