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तीसरी लहर आई तो 7.7 रह सकती है विकास दर

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मुंबई। कोरोना की दूसरी लहर के बाद संभावित तीसरी लहर से भारत की विकास गति बुरी तरह से प्रभावित होगी। ब्रिटिश ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में 0.80 फीसदी की कटौती की है। बार्कलेज के प्रमुख (भारत) अर्थशास्त्री राहुल बजोरिया का कहना है कि वैक्सीनेशन की धीमी गति और देश के कई हिस्सों में लगाए गए लॉकडाउन से इकॉनमी पर नकारात्मक असर पड़ेगा। अगर देश में कोरोना की तीसरी लहर आई तो जी़डीपी घट कर 7.7 फीसद पर सिमट जाएगी।

बार्कलेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 9.2 फीसदी की दर से बढ़ेगी। इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान 74 बिलियन डॉलर (करीब 5.38 लाख करोड़) का नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च तिमाही में भारत की विकास दर 1.3 प्रतिशत रह सकती है।

पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा भारत
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 1.3 प्रतिशत रहेगी। पिछले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 7.3 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) मार्च तिमाही तथा वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी का आरंभिक अनुमान 31 मई को जारी करेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के अनुमान के आधार पर भारत 25 देशों में पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगा। इन 25 देशों ने ही अपने जीडीपी के आंकड़े जारी किए हैं।


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