नई दिल्ली, 22 मार्च 2022 । काले धन के नाम पर सत्ता पाने वाली भाजपा की केंद्र सरकार ने इस मुद्दे से अब अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। काले धन के बारे में सरकार कोई श्वेत पत्र नहीं लाएगी।
काले धन के मामले में श्वेत पत्र लाने के संबंध में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि इस संबंध में कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
काले धन पर लगाम कसने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस लड़ाई में अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं।
तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय ने वर्ष 2012 में तत्कालीन सरकार द्वारा काले धन के बारे में लाए गए श्वेत पत्र का उदाहरण देते हुए सरकार से सवाल किया था कि क्या वह काले धन पर एक अन्य श्वेत पत्र जारी करेगी। इसके जवाब में चौधरी ने कहा, ‘‘ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘काले धन पर सूचनाओं के एकीकरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग के माध्यम से इस पर उचित ध्यान देने के साथ ठोस विधायी और प्रशासनिक ढांचे, प्रणालियां एवं प्रक्रियाएं अपनाएं जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि 2014 में काले धन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के दो पूर्व न्यायाधीशों की अध्यक्षता में विशेष जांच दल का गठन किया गया और विदेशों में रखे गए काले धन से विशेष रूप से एवं अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए काला धन और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 लाया गया।’’
उन्होंने कहा कि इस कानून में कठोर दंडात्मक परिणाम निर्धारित करने के अलावा धन शोधन निवारण कानून 2002 में अघोषित विदेशी संपत्ति के संबंध में जानबूझकर कर से बचने के प्रयास आदि को अनुसूचित अपराध के रूप में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर, 2021 की स्थिति के अनुसार काला धन और कर अधरोपण अधिनियम 2015 के तहत अघोषित विदेशी संपत्ति और 39620 करोड़ रुपए से अधिक की आय वाले 586 मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2012-13 से 2021-22 (जनवरी, 2022 तक) के दौरान आय कर विभाग द्वारा 6730 समूहों के संबंध में की गई तलाशी एवं जब्ती कार्रवाई के तहत 9867.04 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
