मध्य प्रदेश में 29 और राजस्थान में 14 बच्चे हर दिन लापता हुएः एनजीओ की रिपोर्ट
प्रहरी संवाददाता, मुंबई। गैर सरकारी संगठन चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि उत्तर भारत के चार प्रमुख राज्यों में बच्चों के लापता होने के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश के 58 जिलों में प्रतिदिन औसतन आठ बच्चे ( छह लड़कियां और दो लड़के) लापता हुए हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश में औसतन 29 बच्चे और राजस्थान में 14 बच्चे लापता हुए हैं। दिल्ली के आठ पुलिस जिलों में हर दिन पांच बच्चे लापता हुए हैं।
क्राई की ‘स्टेटस रिपोर्ट ऑन मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में लापता लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में पांच गुना अधिक है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में लापता बच्चों के 8,751 मामले और राजस्थान में 3,179 मामले दर्ज किए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 58 जिलों में पिछले साल कुल 2,998 बच्चे लापता हुए हैं। साल 20921 में 58 जिलों से 835 लड़के और 2,163 लड़कियां लापता हुई हैं। राज्य में लापता हुए बच्चों में करीब 88.9 प्रतिशत 12-18 वर्ष के आयु वर्ग से हैं।
आंकड़ों से यह भी पता चला है कि उत्तर प्रदेश में लापता बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सूबे के शीर्ष पांच जिलों लखनऊ, मुरादाबाद, कानपुर नगर, मेरठ और महाराजगंज से बच्चों के लापता होने की खबरें सबसे अधिक हैं। पिछले पांच वर्षों से लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक है।
