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ईपीएफ ब्याज दर और सरकारी बॉन्डों के प्रतिफल में बीच अंतर बढ़ा

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ब्याज दरों में नरमी के रुझान, बॉन्ड प्रतिफल में भारी गिरावट

नई दिल्ली। भारत में ब्याज दरों में नरमी के रुझान के साथ, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर ब्याज दर और 10 साल के सरकारी बॉन्डों पर प्रतिफल के बीच अंतर 2.5 प्रतिशत के साथ 16 साल की ऊंचाई पर पहुंच गया है। बॉन्ड प्रतिफल में भारी गिरावट से ईपीएफओ ब्याज दर में कटौती की संभावना भी बढ़ गयी है।

वित्त वर्ष 2020 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8.5 प्रतिशत थी, जबकि 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल 6 प्रतिशत रहा। ईपीएफ ब्याज दर 1971 से 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल के मुकाबले औसत आधार पर 130 आधार अंक तक ज्यादा रही है। इसलिए मौजूदा अंतर ऐतिहासिक औसत का लगभग दोगुना है।

ब्याज दर के स्तर को बनाए रखने की चुनौती

विश्लेषकों के अनुसार, बॉन्ड प्रतिफल में भारी गिरावट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को ब्याज दर 8.5 प्रतिशत पर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च की ओर से बताया गया कि जब सामान्य ब्याज दरें नीचे आ रही हैं, तो यह देखना होगा कि ईपीएफओ कितने लंबे समय तक 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर बनाए रखेगा।पिछले सप्ताह ईपीएफओ ने कहा कि वह वित्त वर्ष 2020 के लिए अपने सदस्यों को सिर्फ 8.15 प्रतिशत ब्याज चुकाएगा, और शेष 35 आधार अंक ब्याज का भुगतान दिसंबर तक किया जाएगा।

कई अर्थशास्त्रियों का भी यही मानना है कि ब्याज दरों में बड़ी गिरावट से होनेवाले ताजा निवेश पर ईपीएफओ आय प्रभावित होगी। लेकिन अगर निवेशकों के पास 6-7 साल पहले किए गए पुराने निवेश का बड़ा पोर्टफोलियो है, तब उसे मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मायूस होना पड़ेगा।

ऐतिहासिक संबंध

बॉन्ड और ईपीएफ ब्याज दरों के प्रतिफल के बीच ऐतिहासिक संबंध रहा है। आरबीआई से प्राप्त आंकड़े के अनुसार, उदाहरण के लिए, ईपीएफओ ने 1990 के दशक में 12 प्रतिशत का ब्याज चुकाया था, जब बॉन्ड प्रतिफल 10-13 प्रतिशत के दायरे में था। 6 साल पहले बॉन्ड प्रतिफल 8.5 प्रतिशत के आसपास था। ईपीएफओ आय पर शुद्घ प्रभाव पुराने और नए निवेश के बैक-अप पर निर्भर करेगा।

सेवानिवृत्त पूंजी की अधिकता

बता दें कि ईपीएफओ के पास सेवानिवृति पूंजी की बड़ी मात्रा है जो नए योगदान के जरिये हर साल बढ़ रही है। प्राप्त रकम का बड़ा हिस्सा (90 प्रतिशत) हर साल डेट योजनाओं – पीएसयू द्वारा बेचे जाने वाले बॉन्डों में निवेश होता है, जिनमें कुछ निजी क्षेत्र के बॉन्ड (वित्त वर्ष 2017 में 30 प्रतिशत), केंद्र सरकार की प्रतिभूतियां (21 प्रतिशत), और राज्य विकास ऋण (26 प्रतिशत) शामिल हैं।

सभी डेट योजनाओं पर प्रतिफल भारत सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड के प्रतिफल पर अमल करता है। राज्य सरकारों को 10 वर्षीय बॉन्डों ने 6.65 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है, जबकि 10 वर्षीय एएए-रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड 6.9 प्रतिशत पर ही कारोबार कर रहे हैं, जो 10 वर्षीय बॉन्ड के 6 प्रतिशत प्रतिफल से ज्यादा है।

रिटर्न्स संतोषजनक नहीं

ईपीएफओ ने वर्ष 2015 में इक्विटी निवेश में भी दस्तक दी, लेकिन ऐसे निवेश की भागीदारी सालाना पांच प्रतिशत पर सीमित रही। वर्ष 2016 में, यह सीमा बढ़ाकर 10 प्रतिशत की गई, और ईपीएफओ अब एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में निवेश करता है। हालांकि प्रमुख सूचकांकों ने इन पांच साल के दौरान सिर्फ 6.2 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है।

डेट योजनाओं पर नजर

ईपीएफ ब्याज दर और बॉन्ड प्रतिफल के बीच मौजूदा अंतर इसलिए भी है क्योंकि ईपीएफओ अतिरिक्त कमाई करता है, बशर्ते कि ब्याज दर डेट योजनाओं पर दीर्घावधि ब्याज दरों के मुकाबले कम हो। लेकिन स्थिति इसके विपरीत होने पर, ईपीएफओ को अपने अधिशेष से भुगतान करना पड़ सकता है।

 


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