शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अदालत सख्त; मेट्रो-रेल सेवाएं सामान्य रखने का निर्देश
केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त समेत तीन अधिकारियों से जवाब तलब
✍️प्रहरी संवाददाता, नई दिल्ली | मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में जारी आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बैरिकेडिंग, इंटरनेट बंदी और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के आरोपों पर रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए अदालत ने बैरिकेडिंग हटाने, इंटरनेट सेवा बहाल करने और मेट्रो तथा रेल सेवाएं सामान्य रखने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है और किसी को भी कानून के विपरीत हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून के मुताबिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने अपने पूर्व निर्देशों के अनुपालन पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और डीएमआरसी अध्यक्ष डी. थारा को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा। संबंधित अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने विभिन्न याचिकाओं और आवेदनों का उल्लेख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस की कार्रवाई में कथित जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और गैरकानूनी हिरासत के आरोप भी अदालत के सामने उठे। अदालत परिसर के बाहर धारा 163 लागू होने का बोर्ड लगाए जाने और वकीलों को प्रवेश से रोके जाने का मुद्दा उठने पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड तत्काल हटाने का निर्देश दिया।
उधर, कनॉट प्लेस में रविवार को प्रदर्शनकारियों और दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों के बीच टकराव हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, करीब दस मिनट तक तनाव बना रहा, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित की। सीईसी के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आंदोलनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा, एसआईआर पर रोक और मतपत्र प्रणाली की बहाली शामिल हैं। कांग्रेस ने ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का आह्वान किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं।
