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IPL की छप्परफाड़ कमाई: 2008 में जो ‘जुआ’ था, 2024 में वो ‘सोने की खदान’ बन गया!

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  • सोनी से रिलायंस तक का सफर: कैसे 8,000 करोड़ की लीग देखते ही देखते 48,000 करोड़ के पार निकल गई

  • NFL को टक्कर और फुटबॉल को पीछे छोड़ता IPL: ब्रांड वैल्यू में अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘खिलाड़ी’

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई | इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने 2008 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक खेल और व्यापार के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। जब यह लीग शुरू हुई थी, तब इसे एक साहसिक प्रयोग माना जा रहा था, लेकिन आज यह दुनिया की सबसे मूल्यवान खेल संपत्तियों में से एक बन चुकी है। डेलॉयट और होलिहान लोकी (Houlihan Lokey) जैसी प्रमुख वित्तीय परामर्श फर्मों की रिपोर्टों के अनुसार, आईपीएल की ब्रांड वैल्यू और टीमों के टर्नओवर में होने वाली वृद्धि किसी चमत्कार से कम नहीं है।

2008 में आईपीएल की कुल ब्रांड वैल्यू लगभग 1.1 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। 2024 की नवीनतम रिपोर्टों तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 16.4 बिलियन डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। इस असाधारण वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारक मीडिया अधिकारों (Media Rights) की नीलामी है। 2008 में सोनी पिक्चर्स ने 10 साल के लिए लगभग 8,200 करोड़ रुपये में अधिकार खरीदे थे, जबकि 2023-2027 के चक्र के लिए बीसीसीआई ने रिलायंस (Viacom18) और डिज्नी स्टार को कुल 48,390 करोड़ रुपये में ये अधिकार बेचे। मीडिया अधिकारों में हुई इस 600% से अधिक की वृद्धि ने सीधे तौर पर टीमों के टर्नओवर को प्रभावित किया है, क्योंकि बीसीसीआई अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ‘सेंट्रल रेवेन्यू पूल’ के माध्यम से फ्रेंचाइजी के साथ साझा करता है।

टीमों के टर्नओवर की बात करें तो शुरुआती वर्षों में एक औसत फ्रेंचाइजी का वार्षिक राजस्व 50 से 80 करोड़ रुपये के बीच हुआ करता था। वर्तमान में, मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी शीर्ष टीमों का वार्षिक टर्नओवर 400 से 500 करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुका है। टीमों की कमाई के तीन मुख्य स्रोत हैं: सेंट्रल रेवेन्यू (मीडिया राइट्स और टाइटिल स्पॉन्सरशिप), टीम स्पॉन्सरशिप (जर्सी और अन्य विज्ञापन), और टिकटों की बिक्री। डेलॉयट की रिपोर्ट बताती है कि 2023 के सीजन के बाद टीमों के स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू में भी 20-25% की सालाना वृद्धि देखी गई है।

ब्रांड वैल्यू के मामले में व्यक्तिगत टीमों ने भी लंबी छलांग लगाई है। 2008 में जो टीमें 250-400 करोड़ रुपये में खरीदी गई थीं, आज उनकी वैल्यूएशन कई गुना बढ़ गई है। उदाहरण के तौर पर, चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की ब्रांड वैल्यू 2024 में लगभग 231 मिलियन डॉलर (करीब 1,900 करोड़ रुपये) आंकी गई है। इसी तरह, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस की ब्रांड वैल्यू में भी लगातार इजाफा हुआ है। 2022 में गुजरात टाइटंस और लखनऊ सुपर जायंट्स जैसी नई टीमों के आने से इस इकोसिस्टम में और निवेश बढ़ा। लखनऊ की टीम को 7,090 करोड़ रुपये में खरीदा जाना इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों का भरोसा इस लीग की भविष्य की कमाई पर कितना गहरा है।

व्यावसायिक दृष्टिकोण से आईपीएल अब केवल छह सप्ताह का टूर्नामेंट नहीं रह गया है। टीमें अब ‘ग्लोबल ब्रांड’ बन रही हैं और दक्षिण अफ्रीका, यूएई और अमेरिका की लीगों में टीमें खरीदकर साल भर का टर्नओवर सुनिश्चित कर रही हैं। सोर्स के तौर पर बीसीसीआई की वार्षिक रिपोर्ट और होलिहान लोकी की ‘आईपीएल वैल्यूएशन स्टडी’ यह स्पष्ट करती है कि प्रति मैच वैल्यू के मामले में आईपीएल अब एनएफएल (NFL) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान लीग बन गई है।


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