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देश की अदालतों में लंबित मामलों की बाढ़

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नई दिल्ली। देश में क्रमिनिल जस्टिल सिस्टम की कितनी दुर्दशा है, इसकी गाथा बहुत पुरानी है। न्यायिक सुधार की मांग  किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं। विभिन्न अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित कुल मुकदमों में आधे पर एक साल के अंदर फैसले आ जाते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती, जिससे न्याय मिलने की उम्मीदें घट रही हैं।
साल 2020 में देश में प्रति 100 मुकदमों में 59.2 में सजा होती थी। यह आंकड़ा 2021 में घटकर 57 प्रतिशत रह गया। लगभग डेढ़ करोड़ मामले लंबित हैं, जिसमें महिलाओं पर हमला के 27 पर्सेंट (477,958 मामले), अपहरण एवं अगवा करने की घटनाएं 32 पर्सेंट (282,875 मामले), दहेज हत्या के 35 पर्सेंट (54,416 मामले), बलात्कार के 31 पर्सेंट (173,716 मामले) समेत कुल 55,92,882 मामले तीन साल से ज्यादा समय से सुनवाई के लिए लंबित हैं।
लगभग 50 लाख मामले 3 साल से भी ज्यादा पुराने
देश की अदालतों में 1.44 करोड़ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। वर्ष 2021 तक इनमें से 70 प्रतिशत मुकदमे ( 1 साल से ज्यादा) सुनवाई के लिए लंबित थे, जबकि 34 प्रतिशत मुकदमे 3 साल से ज्यादा पुराने थे। साल 2021 में 4.2 लाख मुकदमे ऐसे थे, जो 10 साल से ज्यादा पुराने थे, जिनकी सुनवाई नहीं हो पाई है।
न्यायिक सुधार कागजों में

वर्ष 2003 में  न्यायिक सुधारों पर आई जस्टिस वी.एस. मलिमथ कमिटी की रिपोर्ट कहती है कि भारी संख्या में लंबित पड़े मुकदमे और आरोपियों पर दोषसिद्धी की बहुत कम दर के कारण अदालतों की दशा बेहद दयनीय है। रिपोर्ट आने के बाद अब तक के दो दशकों में दोषसिद्धी की दरों में सुधार आया था, लेकिन पिछले वर्ष 2021 में फिर इसमें गिरावट आ गई। मलिमथ कमिटी की रिपोर्ट में बताया गया था कि विकसित देशों में 90 प्रतिशत मामलों में आरोपियों पर दोष साबित होता है और उन्हें सजा मिलती है, जबकि भारत में यह दर बहुत कम है।

बलात्कार, हत्या के मुकदमों के लिए लंबा इंतजार

साल 2021 में हिंसक अपराधों के करीब 11 लाख और लापरवाही से हुई मौतों के 2 लाख से अधिक मुकदमे पिछले तीन साल से भी ज्यादा वक्त से लंबित हैं। इनमें 50 हजार रेप केस भी शामिल हैं। देश में रेप पीड़िता को वर्षों तक न्याय का इंतजार करना पड़ता है।


 अपराध के प्रकार  कुल लंबित मुकदमे  3+ वर्ष लंबित केस का %
 हत्या का प्रयास  3,51,454  1,33,525                38.00
 बेइज्जती,महिला पर हमला  4,77,958  1,30,077                27.00
 हत्या  2,38,315  1,05,789                44.00
 अपहरण एवं अगवा  2,82,875            91,661.00                32.00
 बलात्कार  1,73,716            54,543.00                31.00
 जोर-जबर्दस्ती/बंधक बनाना        59,322.00            18,901.00                32.00
 दहेज हत्या        54,416.00            18,781.00                35.00

 


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