बाप रे बाप…कसा (दुहा)ई सरकार
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी (PUC)नहीं रहने पर हो सकती है 3 महीने की जेल और 10000 रुपए का जुर्माना ! गजब का सरकारी फरमान है ना….या तो ऑटोमोबाइल कंपनियां लूट रही हैं या फिर सरकार…खैर बनिया की सरकार है… लूटेगी ही…खसोटेगी ही….। तो मुद्दा यह है कि प्रदूषण की कसौटी पर खरा उतरने के लिए जब देश में बीएस-6 मानकों को लागू किया गया है। इसी मानकों पर वाहनों का निर्माण किया जा रहा है, और सभी ऑटो कंपनियां भरोसा दिलाती हैं, कि नए मानकों के अनुरूप ही वाहन बनाए जा रहे हैं, तो फिर प्रदूषण का झंझट खरीदारों पर क्यों….पीयूसी का झंझट क्यों….मियां। वैसे साल 2018 से ही बीएस-6 ईंधन सप्लाई का आदेश जारी किया गया था। तो क्या पेट्रोलियम कंपनियां भी…सरकार के साथ साझेदार हैं…..
मतबल समझ नहीं आ रहा है। कोई समझाए प्लीज…
काला पैसा अब सफेद दिखाई देगा मियां
इंडियाबुल्स फाइनेंस और क्लीक्स समूह यानी Clix Group के साथ लक्ष्मी विलास बैंक की डील नहीं होगी। किसी न किसी कारण डील रद्द कर दी गई…लेकिन इतिहास में शुमार होने जा रहा RBI ने एलवीबी पर एक झटके में ही मोरेटोरियम लागू कर दिया और इसके कुछ मिनट बाद ही यह ऐलान कर दिया कि सिंगापुर के सबसे बड़े बैंक DBS की भारतीय इकाई में ही लक्ष्मी विलास जी का विलय होगा। गजब है ना…सिंगापुर बैंक के जरिए किस-किस सफेदपोश लोगों का काला पैसा अब सफेद दिखाई देने लगेगा… बताइए तो सही….भगतों की टोली….तुम्हें झुनझुना बजाने से फुरसत मिले, तो समझने में लग जाना…क्योंकि प्याज और तेल महंगे हो गए हैं….समझे….
टैक्स छुपाने की जरूरत भिया
भारत में पिछले कुछ सालों में नए दौलतमंद पैदा हुए हैं। नए धनिकों ने जितना भी निवेश किया, जितनी भी कमाई की, इनमें से बहुत सी इनकम नकदी में थी। और बनियों की सरकार में इस एक्स्ट्रा इनकम को टैक्स से छुपाने की सख्त जरूरत थी। कैश की जमाखोरी के लिए सोना और रियल एस्टेट दो बेहतरीन विकल्प थे। कैश कमाने वालों में दोनों एसेट्स की ताबड़तोड़ मांग बढ़ी। आज देखिए….सोना 2005-10 के 6000 रुपये की तुलना में 55 हजार के लेवल को क्रॉस कर गया है। समझ रहे हैं ना….
