✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई / नई दिल्ली | उद्योगपति अनिल अंबानी ने 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं की जांच के बीच सुप्रीम कोर्ट को शपथपत्र देकर आश्वस्त किया है कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे और प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। यह हलफनामा पूर्व नौकरशाह ईएएस शर्मा की उस याचिका के जवाब में दायर किया गया है, जिसमें अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) की कंपनियों से जुड़े कथित ऋण घोटाले की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
अपने हलफनामे में उद्योगपति अंबानी ने कहा कि जुलाई 2025 से चल रही जांच के दौरान वे भारत से बाहर नहीं गए हैं और फिलहाल विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि यात्रा की आवश्यकता हुई तो वे पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेंगे। ED द्वारा 26 फरवरी 2026 को जारी समन के तहत पेश होने की भी उन्होंने प्रतिबद्धता जताई है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ED और CBI को जांच की धीमी रफ्तार और सीमित दायरे पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ऋण गबन की जांच में “अस्पष्ट देरी” पर चिंता जताई और ED से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने को कहा। सीबीआई द्वारा अलग-अलग बैंकों की शिकायतों को एक ही एफआईआर से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी पीठ ने सवाल उठाए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दोनों एजेंसियों ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप है कि कई बैंक शिकायतों और फॉरेंसिक ऑडिट के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने में वर्षों की देरी हुई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।
