वोट के बदले उपहार के आरोप, महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई
✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | महानगर पालिका चुनावों से ठीक पहले महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहन’ योजना राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देते हुए सरकार को जनवरी माह की किस्त अग्रिम रूप से जारी करने से रोक दिया है। यह कार्रवाई उन मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के बाद की गई, जिनमें दावा किया गया था कि मकर संक्रांति से पहले पात्र महिलाओं के बैंक खातों में दिसंबर और जनवरी की संयुक्त किस्त के रूप में 3,000 रुपये भेजे जाएंगे। विपक्षी दलों ने इसे “वोट के बदले उपहार” की राजनीति बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा नेता और मंत्री गिरीश महाजन के बयान के बाद मामला और गरमा गया था। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री की ओर से “मकर संक्रांति उपहार” करार दिया था। इस घोषणा पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि 15 जनवरी को 29 नगर निकायों में होने वाले चुनावों से ठीक पहले यह कदम मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। शिकायतों के बाद महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया और स्पष्ट किया कि आचार संहिता की अवधि में किसी भी योजना के तहत अग्रिम भुगतान की अनुमति नहीं है।
आयोग ने कहा कि चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की गई कल्याणकारी योजनाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन भविष्य की किस्तों को एक साथ देना नियमों के खिलाफ है। उल्लेखनीय है कि ‘लाड़ली बहन’ योजना के तहत पात्र महिला लाभार्थियों को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है और इसे 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति की सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने योजना को सतत बताते हुए आचार संहिता के दायरे से बाहर बताया, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे चुनावी लाभ के लिए नियमों का उल्लंघन करार दिया।
