✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावी रण की पहली आहट के साथ ही सत्ताधारी महायुति के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली सूची में 70 उम्मीदवारों को ‘एबी फॉर्म’ जारी किए हैं, लेकिन इस सूची ने पार्टी की रणनीति से ज्यादा उसके भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है। मुंबई के साथ-साथ अब पुणे जिले में भी भाजपा के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं, जिससे चुनाव से पहले ही संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाजपा की सूची में ‘अपनों’ को प्राथमिकता
भाजपा की पहली सूची में पुराने चेहरों और कद्दावर नेताओं के रिश्तेदारों को तरजीह दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय समीकरणों और जीत की संभावनाओं को देखते हुए उन उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है, जिनका पारिवारिक या संगठनात्मक आधार मजबूत माना जाता है।
सूची में पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया, पूर्व विधायक आर.के. पुरोहित के बेटे आकाश पुरोहित, और पूर्व कॉर्पोरेटर के बेटे तेजिंदर सिंह तिवाना जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर और हर्षिता नार्वेकर को भी फिर से टिकट दिया गया है।
कुछ सीटों पर पार्टी ने सहानुभूति फैक्टर को भी अहम माना है। दहिसर से तेजस्वी घोसालकर को मैदान में उतारा गया है, जो पूर्व विधायक विनोद घोसालकर की बहू हैं। फरवरी 2024 में उनके पति अभिषेक घोसालकर की हत्या के बाद यह परिवार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में रहा है।
बदलापुर में भी भाजपा ने संगठनात्मक संतुलन साधते हुए शहर अध्यक्ष राजेंद्र घोरपड़े और उनकी पत्नी रचिता घोरपड़े को अलग-अलग पदों के लिए नामांकित किया है।
शिंदे गुट की चाल से महायुति में खटास
मुंबई और आसपास के इलाकों में जहां भाजपा की सूची पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं बदलापुर नगर परिषद चुनावों में शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के फैसलों ने गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ा दिया है। शिंदे गुट ने स्थानीय नेता वामन म्हात्रे के परिवार के छह सदस्यों को टिकट देकर राजनीतिक हलचल मचा दी है।
भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने इस कदम को ‘एकमुश्त परिवारिक आवंटन’ बताते हुए नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इससे वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।
पुणे जिले में खुली बगावत
मुंबई के बाहर पुणे जिले में भी भाजपा के भीतर असंतोष अब दबा नहीं रह गया है। नगर निकाय और जिला परिषद चुनावों को लेकर टिकट वितरण से नाराज कई स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने खुलकर बगावत का रास्ता अपनाया है। कुछ नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, जबकि कुछ ने पार्टी नेतृत्व पर ‘चंद चेहरों और परिवारों’ को बार-बार मौका देने का आरोप लगाया है।
पुणे ग्रामीण और शहरी इलाकों में यह असंतोष संगठन के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि यह जिला लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं की बढ़ती बेचैनी
शिंदे गुट द्वारा कुछ अन्य परिवारों को भी एक से अधिक टिकट दिए जाने से महायुति के भीतर बेचैनी और बढ़ गई है। पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ता खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं।
बीएमसी चुनावों की पहली सूची और पुणे में उभरी बगावत ने साफ कर दिया है कि चुनावी मुकाबले से पहले ही सत्ताधारी गठबंधन को भीतरू असंतोष और समन्वय की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
