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यूपी में शराब की ‘सेल’: ठेके बने मॉल, खरीदार बने ‘शराब के शहंशाह’!

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हाइलाइट्स:

✅ शराब की दुकानों पर ‘बाय वन, गेट वन फ्री’ ऑफर ने मचाया तहलका
✅ पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए दुकानदारों का अनोखा तरीका
✅ भीड़ को संभालने के लिए पुलिस की तैनाती, हंगामे की आशंका

 

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, लखनऊ। उत्तर प्रदेश यानी यूपी में इन दिनों योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में शराब ठेकों पर ऐसा नज़ारा देखने को मिल रहा है, मानो किसी लग्जरी ब्रांड की ‘एंड ऑफ सीज़न सेल’ चल रही हो। भीड़ ऐसी कि मानो मुफ्त राशन बंट रहा हो और लोग इस डर से स्टॉक भर रहे हैं कि कहीं यह दुर्लभ चीज़ दोबारा ना मिले! शराब के ठेकों पर ‘बाय वन, गेट वन फ्री’ ऑफर ने हालात ऐसे बना दिए कि ग्राहकों की लंबी कतारें और धक्का-मुक्की रोकने के लिए पुलिस को बीच-बचाव तक करना पड़ा। युवा बेरोजगारों के अच्छे दिन आए न आए. शराब के शौकीनों और ठेकेदारों की चांदी कट रही है और साथ में सरकार की तिजोरी भी बढ़ रही है।

‘कृपया लाइन में आएं’, लेकिन लाइन 2 किलोमीटर लंबी!

बता दें कि यूपी में शराब के लाइसेंस 31 मार्च को खत्म हो रहे हैं। इस बार सरकार ने नई ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली लागू कर दी है, जिससे लाइसेंस का नवीनीकरण अपने आप नहीं होगा। सरकार के इस फरमान के बाद शराब ठेकेदारों और बड़े दुकानदारों के हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने अपने स्टॉक को ‘जल्दी खत्म करने’ के लिए ऐसा ऑफर निकाल दिया कि जनता की भीड़ उमड़ पड़ी। इसे “शराब का भक्तजन समागम” कहें तो गलत नहीं होगा!

लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में एक ग्राहक ने कहा, “आज तक कभी इतनी सस्ती शराब नहीं मिली। अगली बार ऐसा ऑफर मिलेगा या नहीं, कौन जाने!” नोएडा के सेक्टर 137 में रहने वाले रविंदर कुमार ने बताया, “आज ऑफिस जाने का मन नहीं किया, सोचा मौका अच्छा है, दो-चार बोतलें ले ही लूं।” उनके जैसे हजारों लोगों ने इस ‘मौका भी है, दस्तूर भी’ टाइप माहौल का जमकर फायदा उठाया।

देसी से लेकर विदेशी तक, सबकुछ ‘फ्री-फ्री-फ्री’ का नशा!

लोगों में इतनी बेसब्री थी कि जिनका झुकाव सिर्फ़ देसी शराब तक था, वे भी सीधे विदेशी ब्रांड की बोतलें उठाने लगे। आगरा के राहुल कुमार ने मज़ाकिया लहजे में कहा, “जब एक के साथ एक मुफ्त मिल ही रही है, तो क्यों न स्कॉच ट्राई कर लें?”

मुजफ्फरनगर के एक ठेकेदार ने बताया कि आम दिनों की तुलना में उनकी बिक्री 10 गुना तक बढ़ गई है। “सुबह 11 बजे दुकान खोलते हैं, लेकिन लोग 6 बजे से ही कतार में खड़े मिलते हैं, मानो नौकरी इंटरव्यू देने आए हों!”

पुलिस का पहरा: ‘शराब लीजिए, पर प्यार से’

बढ़ती भीड़ और संभावित हंगामे को देखते हुए पुलिस को ठेकों के बाहर तैनात कर दिया गया। मेरठ के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "लोग शराब लेने आए हैं, लेकिन माहौल ऐसा बन गया जैसे किसी क्रिकेट मैच की टिकटें बिक रही हों। हमें बीच-बीच में भीड़ को समझाना पड़ रहा है कि 'अभी स्टॉक खत्म नहीं हुआ है'।"
लाइसेंस की नई लॉटरी प्रणाली ने जहां दुकानदारों के लिए सिरदर्द बढ़ाया है, वहीं शराब प्रेमियों के लिए यह “सोने पर सुहागा” बन गया है। जनता को जितना मजा आ रहा है, ठेकेदारों को उतना ही सुकून, और पुलिस को उतनी ही “ड्यूटी एक्सट्रा टाइम” की टेंशन! इस “शराब महोत्सव” में कोई अफरा-तफरी न मच जाए, इसलिए पुलिस को भी एक्टिव मोड में आना पड़ा।

 


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