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PM Internship Scheme की असलियत खुली- राज्यों में आवेदन आधे से भी कम, कई प्रदेशों में 75% गिरावट

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  • 10,831 करोड़ का बजट, खर्च सिर्फ 73 करोड़
  • कंपनियों का ठंडा रुख- 17 कंपनियों से सिर्फ
  • 95 प्रस्ताव, कई ने सिर्फ 1 स्लॉट खोला
  • मोदी सरकार के ‘एक करोड़ युवा’ मिशन पर आंकड़ों ने बड़ा सवाल लगा दिया

✍🏻 डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) के ताज़ा आंकड़े लोकसभा में पेश हुए, जिनमें योजना की प्रगति सरकार के दावों के बिल्कुल विपरीत दिखाई दी। युवा सशक्तिकरण के नाम पर शुरू की गई इस “महत्वाकांक्षी” स्कीम का लक्ष्य पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करना था, लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि युवाओं ने इस योजना को उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी उम्मीद सरकार को थी।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, दोनों चरणों में 1.3 लाख से अधिक इंटर्नशिप ऑफर जारी किए गए, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार करने वालों की संख्या सिर्फ 16,000 रही। यह वही योजना है जिसे सरकार ने देश के युवाओं का भविष्य बदलने वाला बताया था। शुरुआती चरण में 82,000 ऑफर जारी हुए, स्वीकार किए गए सिर्फ 8,700; दूसरे चरण में 83,000 प्रस्ताव दिए गए, लेकिन 24,600 ही स्वीकार किए गए। सरकारी पोस्टरों से ज़्यादा चमक युवाओं को कहीं और ही दिखी।

योजना में शामिल होने के बाद भी युवाओं की दिलचस्पी टिक नहीं पाई। आधिकारिक डेटा के मुताबिक, 6,618 प्रशिक्षुओं यानी कुल प्रतिभागियों के 41% ने 12 महीने का प्लेसमेंट पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम छोड़ दिया। विपक्ष ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि “PMIS में इंटर्न से ज्यादा भरोसा इस्तीफा देता दिख रहा है।”

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए PMIS के तहत 10,831 करोड़ रुपये का विशाल बजट रखा गया, लेकिन 30 सितंबर 2025 तक खर्च हुए सिर्फ 73.72 करोड़ रुपये। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि योजना का वास्तविक कामकाज कहां हो रहा है, फाइलों में या ज़मीन पर।

राज्यों में आवेदन संख्या दूसरे चरण में भारी गिरावट के साथ सामने आई। मिजोरम में 75%, हरियाणा में 74.6%, असम में 60.5% और यूपी में 50.2% की कमी दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश 51,225 आवेदनों के साथ शीर्ष पर रहा, लेकिन कुल स्वीकारोक्ति दर वहीं की वहीं रही।

कॉरपोरेट भागीदारी भी योजना की स्थिति को साफ़ दिखाती है। 17 कंपनियों ने मिलकर सिर्फ 95 प्रस्ताव दिए। मुथूट फाइनेंस 32 के साथ सबसे आगे रहा, जबकि टेक महिंद्रा 20 पर सिमट गया। कई कंपनियों ने तो सिर्फ 1–1 स्लॉट देकर मानो औपचारिकता पूरी कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र में सिर्फ ओएनजीसी ने पूर्णकालिक प्रस्ताव जारी किए, जबकि अन्य पीएसयू इस योजना से दूर ही रहे।


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