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विकासेतर कार्यों पर छह साल में ब्याज का भुगतान दोगुना हुआ

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2016-17 में 724 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान
2021-22 में 1,244 हजार करोड़ रुपया ब्याज चुकाना पड़ रहा

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। पिछले छह साल के दौरान सरकार को ब्याज के रूप में दोगुनी रकम चुकानी पड़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि छह साल पहले सरकार को जहां 724 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान करना पड़ता था, आज यह रकम बढ़कर 1,244 हजार करोड़ रुपये हो गई है। इसके अलावा, सरकार ने आय और संपत्ति पर कर भी डेढ़ गुना ज्याद कर दिया है।
आरबीआई की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि वर्ष 2016-17 में सरकार को 724 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान करना पड़ता था। वर्ष 2017-18 में यह रकम बढ़कर 815 हजार करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2018-19 में 895 हजार करोड़ रुपये, वर्ष 2019-20 में 956 हजार करोड़, वर्ष 2020-21 में 1,082 हजार करोड़ रुपये और वर्ष 2021-22 में सरकार को 1,244 हजार करोड़ रुपये विकासेत्तर कार्य के तहत ब्याज का भुगतान करना पड़ रहा है।

इस दौरान आय और संपत्ति पर कर भी डेढ़ गुना ज्यादा कर दिया गया है। वर्ष 2016-17 में जहां संपत्ति पर कर के रूप में सरकार को 966 हजार करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं वर्ष 2017-18 में यह रकम बढ़कर 1,121 हजार करोड़ रुपये हो गई। इसी तरह, वर्ष 2018-19 में 1,246 हजार करोड़ रुपये, वर्ष 2019-20 में 1,216 हजार करोड़ रुपये, वर्ष 2020-21 में 1,072 हजार करोड़ रुपये और वर्ष 2021-22 में संपत्ति पर कर के रूप में सरकार को 1,311 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हो रहे हैं।


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