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मां के शव के साथ एक साल से कमरे में कैद रहीं दो बेटियां, जबरन घुसी पुलिस तो बोलीं- अंतिम संस्कार के लिए नहीं थे पैसे

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हाइलाइट्स:

  • दो बेटियां अपनी मां के शव के साथ एक साल से रह रही थीं
  • दोनों ने पुलिस को बताया कि मां की मौत एक साल पहले हो गई थी
  • घर का सामान और गहने बेचकर घर का खर्च चलाया, लेकिन अंतिम संस्कार नहीं किया

 

डिजिटल न्यूज डेस्क, वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र धर्मनगरी वाराणसी से दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां दो बेटियां अपनी मां के शव के साथ पिछले एक साल से रह रही थीं। जब रिश्तेदार पहुंचे तो घटना का खुलासा हुआ।

पुलिस जब जबरन दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी तो दोनों बेटियां मां के कंकाल के साथ बैठी हुई दिखाई दीं। दोनों ने पुलिस को बताया कि उनकी मां की मौत एक साल पहले हो गई थी, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। पुलिस ने कंकाल को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। दोनों बेटियों से पूछताछ की जा रही है।

यह घटना लंका थाना क्षेत्र के मदरवा गांव की है। मदरवा निवासी ऊषा त्रिपाठी की मौत 8 दिसंबर 2022 को हो गई थी। उसकी बेटियों ने अंतिम संस्कार नहीं किया। बुधवार को जब उनकी एक रिश्तेदार घर पहुंची, तो पता चला कि ऊषा त्रिपाठी की मौत हो चुकी है। पड़ोसियों के मुताबिक, ऊषा त्रिपाठी के पति की मौत दो साल पहले हो गई थी। उसकी बड़ी बेटी पल्लवी संतक (27 साल) है, जबकि दूसरी बेटी वैश्विक त्रिपाठी दसवीं की छात्रा है।

कई एंगल से जांच में जुटी पुलिस

पुलिस पूरे मामले में कई एंगल से जांच कर रही है। पुलिस ने जब दोनों से यह पूछा कि एक साल तक पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलता रहा, तो उन्होंने बताया कि घर का सामान और गहने बेचकर खाने का इंतजाम किया। फ़िलहाल पुलिस इस बात की छानबीन में जुटी है कि ऊषा त्रिपाठी की मौत नेचुरल थी या हत्या। लंका थाना प्रभारी ने बताया कि कंकाल का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट के बाद ही खुलासा होगा।


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