पांच साल में मंज़ूर हुए 848 करोड़ रुपये
80 फ़ीसदी रकम का सही उपयोग नहीं
नई दिल्ली। भारत सरकार की ओर से 22 जनवरी 2015 में लॉन्च की गई ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना कितनी सफल हुई है, इसका खुलासा संसदीय समिति की रिपोर्ट में हुआ है। इस योजना का प्रदर्शन राज्यों में अच्छा नहीं रहा है। योजना के लिए आबंटित रकम का अधिकतर हिस्सा प्रचार पर खर्च किया गया है।
लोकसभा की महिला सशक्तिकरण समिति की नवीनतम रिपोर्ट सरकार ने जारी की है। समिति ने धन का सही उपयोग ना होने को लेकर निराशा जाहिर की है। बता दें कि महाराष्ट्र भाजपा लोकसभा सांसद हीना विजयकुमार गावित की अध्यक्षता वाली समिति ने लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की।
शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण” पर हीना गावित ने पांचवीं रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना लगभग 80 प्रतिशत रकम विज्ञापनों पर खर्च किया है। महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर खर्च नहीं हो पाया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2014-15 से वर्ष 2019-20 तक इस योजना के लिए कुल 848 करोड़ रुपये मंजूर हुआ था। वर्ष 2020-21 में महामारी के काल को छोड़कर राज्यों को 622.48 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। लेकिन केवल 25.13 प्रतिशत यानी 156.46 करोड़ रुपये ही 8स योजना पर राज्यों द्वारा खर्च किए गए हैं। वर्ष 2016- 2019 के दौरान जारी किए गए कुल 446.72 करोड़ रुपये में से मीडिया विज्ञापनों पर ही 78.91 प्रतिशत रकम खर्च किया गया।
