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आर्थिक असमानता में नंबर 1 बना भारत

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आर्थिक असमानता में नंबर 1 बना भारत
10 फीसदी लोगों के पास है देश की 57 प्रतिशत आय

मुंबई। ‘न्यू इंडिया’ में बढ़ती असमानताओं ने गरीबों और अमीरों, पुरुषों और महिलाओं, अगड़ों और पिछड़ों के बीच एक बड़ी खाई बना दी है। नए भारत में बेरोजगारी, गरीबी, भूख जैसे मुद्दे अब भी कायम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में देश के अंदर आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ती जा रही है।

सबसे ज्यादा आर्थिक असमानता
”वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2022” की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का नाम उन देशों की लिस्ट में शामिल है, जहां सबसे ज़्यादा आर्थिक असमानता पाई जाती है। भारत मे गरीब और समृद्ध लोगों के बीच की खाई लगातार चौड़ी हो रही है।

‘सबका साथ-खास लोगों का विकास’
मशहूर अर्थशास्त्रियों की ओर से तैयार की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में सबसे संपन्न एक प्रतिशत लोग देश की 22 प्रतिशत आमदनी कमाते हैं, जबकि दूसरी तरफ कुल आबादी के आधे लोग (50%) मात्र 13 प्रतिशत आमदनी कमाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस असमानता की एक वजह पूंजीवाद है। भारत में जब से अर्थव्यवस्था पर सरकार ने सीधे तौर पर नियंत्रण करना कम कर दिया, तब से देश में निजी संपत्ति तेज़ी से बढ़ी। निजी संपत्ति जहां वर्ष 1980 में 290 प्रतिशत थी, वह तेजी से बढ़कर वर्ष 2020 में 560 फीसदी हो गई।

दरअसल, भारत की व्यस्क जनसंख्या की औसत आय 2,04,200 रुपये है। देश की आधी आबादी 53,610 रुपये कमाती है, जबकि शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी इसका 20 गुना यानी 11,66,520 रुपये कमाती है। इन्हीं 10 प्रतिशत लोगों की आमदनी देश की कुल आमदनी का 57 प्रतिशत है।


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