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एक अणु, दो चेहरे… सही चेहरे की तलाश को नोबेल

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  • दवा के अणुओं के ‘सही रूप’ को चुनने की राह खोलने वाले कगन और सोई सम्मानित

  • रसायन विज्ञान की सदी पुरानी पहेली पर मिली निर्णायक सफलता

✍️ विशेष अंतरराष्ट्रीय डेस्क, स्टॉकहोम/टोक्यो | रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई है, जिन्होंने अणुओं की जटिल ‘दाएं और बाएं’ दर्पण-प्रतिबिंब संरचना को नियंत्रित करने के निर्णायक उपकरण विकसित किए हैं।

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फ्रांसीसी वैज्ञानिक हेनरी बी. कगन और जापानी रसायनज्ञ केन्जो सोई को असममित रासायनिक प्रतिक्रियाओं (असममित संश्लेषण) पर उनके युगांतकारी कार्यों के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। उनकी इस खोज ने रसायन विज्ञान जगत को पहली बार यह अभूतपूर्व क्षमता दी कि वे किसी पदार्थ के दो दर्पण-रूपों में से केवल वांछित और सुरक्षित रूप को सटीक रूप से तैयार कर सकें, जिसका सीधा और क्रांतिकारी प्रभाव आधुनिक जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण पर पड़ा है।

जीव विज्ञान और रसायन शास्त्र में जीवन के लिए जरूरी कई अणु ठीक हमारे बाएं और दाएं हाथ की तरह एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘काइरलिटी’ कहा जाता है। मानव शरीर और प्रकृति आम तौर पर इन दोनों में से किसी एक ही रूप को स्वीकार करती है, जिसे ‘होमो-काइरैलिटी’ कहते हैं।

नोबेल समिति के सदस्य पीटर सोमफाई के अनुसार, किसी औषधि का एक दर्पण-रूप जहां जीवन बचाने का काम कर सकता है, वहीं उसका दूसरा दर्पण-रूप शरीर में गंभीर दुष्प्रभाव या विपरीत असर पैदा कर सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों के लिए यह अनिवार्य था कि वे रासायनिक क्रियाओं के दौरान केवल सुरक्षित और प्रभावी रूप को ही चुनिंदा तरीके से बना सकें।

इस वैज्ञानिक खोज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 19वीं सदी में फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर के शोध से शुरू हुई थी, जब उन्होंने टारट्रिक एसिड पर काम करते हुए पाया था कि बैक्टीरिया केवल प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एक विशेष आणविक रूप को ही किण्वित करते हैं। लेकिन दशकों तक प्रयोगशालाओं में केवल एक विशिष्ट काइरल रूप का निर्माण करना रसायन विज्ञान की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली बना रहा।

इस सूक्ष्म अंतर की भयानक त्रासदी दुनिया ने 1960 के दशक में ‘थैलिडोमाइड’ मामले में देखी थी, जहां दवा के दूसरे दर्पण-रूप के कारण हजारों नवजात बच्चों में गंभीर जन्मजात शारीरिक विकृतियां पैदा हो गई थीं। कगन और सोई के अनुसंधानों ने असममित रासायनिक प्रतिक्रियाओं को संभव बनाकर इसी ऐतिहासिक जोखिम को हमेशा के लिए समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।

नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने केन्जो सोई को फोन कर बधाई दी और इसे पूरे देश के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण बताया। नोबेल सप्ताह में चिकित्सा और भौतिकी के बाद यह तीसरा घोषित पुरस्कार है। विजेताओं को आगामी 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर स्टॉकहोम में स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ द्वारा स्वर्ण पदक और 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर की साझा पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

 


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