इज ऑफ डूइंग बिजनेस की असलियत
प्रहरी संवाददाता, मुंबई। इज ऑफ डूइंग बिजनेस व ट्रांसपेरेंसी का नगाड़ा पीटनेवाली सरकार के कार्यकाल में 1500 से अधिक प्रोजेक्ट में औसतन 42 महीने का विलंब हुआ है तो वहीं मूल लागत भी 22 पर्सेंट की बढ़ोतरी हो चुकी है। इनमें से 661 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं, जबकि देरी और अन्य कारणों से 386 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स की लागत में तकरीबन 4.7 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।
तय अनुमान से 22.19 प्रतिशत बढ़ी लागत
मंत्रालय की जुलाई 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 386 परियोजनाओं की लागत तय अनुमान से 22.19 प्रतिशत यानी 4.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है। देश भर में इस तरह की 1,505 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से 386 प्रोजेक्ट की लागत बढ़ गई है, जबकि 661 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।
मूल लागत 21,21,793.23 करोड़ रुपये
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन 1505 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत 21,21,793.23 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब यह बढ़कर 25,92,537.79 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। इन परियोजनाओं की लागत 4,70,744.56 करोड़ रुपये बढ़ गई है। इसके अलावा, जुलाई 2022 तक इन परियोजनाओं पर 13,50,275.69 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कुल अनुमानित लागत का 52.08 प्रतिशत है।
औसत 41.83 महीने देरी से चल रहे हैं प्रोजेक्ट:
रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से चल रही 661 परियोजनाओं में से 134 परियोजनाएं एक महीने से 12 महीने, 114 परियोजनाएं 13 से 24 महीने की, 289 परियोजनाएं 25 से 60 महीने की और 124 परियोजनाएं 61 महीने या अधिक की देरी से चल रही हैं। इन 661 परियोजनाओं में हो रहे विलंब का औसत 41.83 महीने है।
