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बढ़ती महंगाई के दौर में विकास दर को बरकरार रखने की चुनौती

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मुंबई। केंद्र सरकार ने एक रिपोर्ट में कहा है कि देश के समक्ष निकट भविष्य में अपने राजकोषीय घाटे का प्रबंधन, आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने, महंगाई और चालू खाते के घाटे को काबू में करने की चुनौतियां हैं।

दुनिया में निम्न आर्थिक वृद्धि दर के साथ ऊंची मुद्रास्फीति रहने (स्टैगफ्लेशन) की आशंका जताई जा रही है, लेकिन भारत में इसका जोखिम कम है। भारत अन्य देशों के मुकाबले इन चुनौतियों से निपटने के मामले में बेहतर स्थिति में है।

वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में यह कहा गया है। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में प्रस्तावित पूंजीगत व्यय से आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की संभावना है। हालांकि डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद सकल राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर जोखिम भी उत्पन्न हुआ है।

राजकोषीय घाटा बढ़ने से चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है। इससे महंगे आयात का प्रभाव बढ़ेगा और रुपये के मूल्य में कमी आएगी। इससे बाह्य असंतुलन बढ़ेगा, लिहाजा घाटा बढ़ने तथा रुपये की विनिमय दर में गिरावट का जोखिम है।

 


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